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'अंग्रेजों के राज में भारत में कभी चलते थे भगवान राम के सिक्के', जानें वायरल फोटो की असली कहानी

First Published May 13, 2020, 7:15 PM IST
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नई दिल्ली. पूरे देश में लॉकडाउन लगा है और लोग घरों में कैद हैं। इस बीच लोग धार्मिक सीरियल देख टाइम पास कर रहे हैं। दूरदर्शन आदि पर महाभारत और रामायण का प्रसारण किया गया था। जिसकी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा रही। अब बीते दो दिनों से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल है जिसमें एक सिक्के के दोनों साइड्स को देखा जा सकता है। इनमें पहले सिक्के पर भगवान राम के साथ, सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न देखे जा सकते हैं और दूसरे साइड पर कमल का फूल और 2 आना लिखा देखा जा सकता है। पोस्ट के साथ दावा किया जा रहा है कि 1818 में यह सिक्के भारतीय मुद्रा का हिस्सा थे और उस समय ब्रिटिश रूल होने के बावजूद भगवान राम की छवि वाले ये सिक्के चलते थे।

 

तस्वीर देख लोग इसे धड़ाधड़ शेयर कर रहे हैं इसलिए हमने इस फोटो की फैक्ट चेकिंग में जांच-पड़ताल की।

वायरल पोस्ट में कांसे के सिक्के की दोनों साइड्स को देखा जा सकता है। इनमें पहले सिक्के पर भगवान राम के साथ, सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न देखे जा सकते हैं और दूसरे साइड पर कमल का फूल और 2 आना लिखा देखा जा सकता है। 

वायरल पोस्ट में कांसे के सिक्के की दोनों साइड्स को देखा जा सकता है। इनमें पहले सिक्के पर भगवान राम के साथ, सीता, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न देखे जा सकते हैं और दूसरे साइड पर कमल का फूल और 2 आना लिखा देखा जा सकता है। 

 वायरल पोस्ट क्या है?

 

एक फेसबुक यूजर ने पोस्ट के साथ डिस्क्रिप्शन में लिखा है, “यह एक संयोग ही कहा जाएगा कि सन् 1818 में जो 2 आना का सिक्का होता था उसमें राम, लक्ष्मण, जानकी, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान सब की प्रतिमा होती थी और उस समय हमारे देश में अंग्रेजों का शासन था और उस सिक्के के दूसरे तरफ कमल का फूल बना हुआ था व दीप प्रज्ज्वलित किया गया था।

 

ऐसे भी प्रमाण मिल रहे हैं कि जब कमल का राज आएगा, तब अयोध्या में दीपोत्सव मनाया जाएगा तथा भगवान श्री राम का भव्य मंदिर बनेगा और वह समय अब आ गया है। विगत 3 वर्षों से अयोध्या में दीपोत्सव पर्व मनाया जा रहा है। कमल का राज आ चुका है और कोर्ट ने भी भव्य राम मंदिर का समय निर्धारित कर दिया है। प्रमाण के तौर पर मैं आप सबको सन् 1818 का दो आना का सिक्का प्रेषित कर रहा हूं। जय जय श्री राम श्री गणेशाय नमः”
 

 वायरल पोस्ट क्या है?

 

एक फेसबुक यूजर ने पोस्ट के साथ डिस्क्रिप्शन में लिखा है, “यह एक संयोग ही कहा जाएगा कि सन् 1818 में जो 2 आना का सिक्का होता था उसमें राम, लक्ष्मण, जानकी, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान सब की प्रतिमा होती थी और उस समय हमारे देश में अंग्रेजों का शासन था और उस सिक्के के दूसरे तरफ कमल का फूल बना हुआ था व दीप प्रज्ज्वलित किया गया था।

 

ऐसे भी प्रमाण मिल रहे हैं कि जब कमल का राज आएगा, तब अयोध्या में दीपोत्सव मनाया जाएगा तथा भगवान श्री राम का भव्य मंदिर बनेगा और वह समय अब आ गया है। विगत 3 वर्षों से अयोध्या में दीपोत्सव पर्व मनाया जा रहा है। कमल का राज आ चुका है और कोर्ट ने भी भव्य राम मंदिर का समय निर्धारित कर दिया है। प्रमाण के तौर पर मैं आप सबको सन् 1818 का दो आना का सिक्का प्रेषित कर रहा हूं। जय जय श्री राम श्री गणेशाय नमः”
 

क्या दावा किया जा रहा है?

 

इस कमल के फूल के साथ दावा किया गया कि, 1818 में भगवान राम के सिक्के चलते थे, तब भगवान राम के सिक्कों पर कमल का फूल मुद्रित था इसलिए इससे ये संकेत मिलते हैं कि भविष्य में कमल के फूल की सरकार बनेगी। । कमल का राज आ चुका है और कोर्ट ने भी भव्य राम मंदिर का समय निर्धारित कर दिया है। इसलिए ये सिक्का आगे शेयर करने की अपील की गई है।

क्या दावा किया जा रहा है?

 

इस कमल के फूल के साथ दावा किया गया कि, 1818 में भगवान राम के सिक्के चलते थे, तब भगवान राम के सिक्कों पर कमल का फूल मुद्रित था इसलिए इससे ये संकेत मिलते हैं कि भविष्य में कमल के फूल की सरकार बनेगी। । कमल का राज आ चुका है और कोर्ट ने भी भव्य राम मंदिर का समय निर्धारित कर दिया है। इसलिए ये सिक्का आगे शेयर करने की अपील की गई है।

सच क्या है?

 

हमने इस तस्वीर की पहले भी पड़ताल की थी और पाया था कि ये सिक्का कभी भी भारतीय मुद्रा का हिस्सा नहीं रहा। ये एक रामटनका या टोकन टेम्पल कॉइन है। मंदिर का स्मृति चिह्न वाणिज्य के लिए उपयोग किए जाने वाले सिक्के नहीं हैं, बल्कि हिंदू मंदिरों से संबंधित टोकन हैं। इस पोस्ट की पड़ताल करने के लिए हमने इन तस्वीरों को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया था। 

 

(Demo Pic)

सच क्या है?

 

हमने इस तस्वीर की पहले भी पड़ताल की थी और पाया था कि ये सिक्का कभी भी भारतीय मुद्रा का हिस्सा नहीं रहा। ये एक रामटनका या टोकन टेम्पल कॉइन है। मंदिर का स्मृति चिह्न वाणिज्य के लिए उपयोग किए जाने वाले सिक्के नहीं हैं, बल्कि हिंदू मंदिरों से संबंधित टोकन हैं। इस पोस्ट की पड़ताल करने के लिए हमने इन तस्वीरों को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया था। 

 

(Demo Pic)

पड़ताल 

 

हमें https://smallestcoincollector.blogspot.com/ नाम का एक ब्लॉग मिला था, जिसमें इनमें से एक तस्वीर थी। ब्लॉग पर फर्जी सिक्कों के संग्रह पर आलेख था, जिसमें इस सिक्के को भी फर्जी बताया गया था। इसके बाद हमने सीधा RBI की वेबसाइट पर पुराने सिक्कों को ढूंढा, क्योंकि वायरल पोस्ट में सिक्का अठारहवीं सदी का बताया गया है। इसलिए हमने अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के सिक्कों के बारे में ढूंढा।

 

भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर भारतीय सिक्के का पूरा इतिहास है। यहां कहीं भी वायरल हो रहे सिक्के नहीं दिखे। दिल्ली के नेशनल म्यूजियम के आर्कियोलॉजिस्ट और प्रवक्ता संजीव सिंह से ने इन सिक्कों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “इन सिक्कों की ऐतिहासिकता को प्रमाणित नहीं किया जा सकता। ये सिक्के कभी भी वाणिज्य के लिए उपयोग नहीं किये गए।”

 

(Demo Pic)

पड़ताल 

 

हमें https://smallestcoincollector.blogspot.com/ नाम का एक ब्लॉग मिला था, जिसमें इनमें से एक तस्वीर थी। ब्लॉग पर फर्जी सिक्कों के संग्रह पर आलेख था, जिसमें इस सिक्के को भी फर्जी बताया गया था। इसके बाद हमने सीधा RBI की वेबसाइट पर पुराने सिक्कों को ढूंढा, क्योंकि वायरल पोस्ट में सिक्का अठारहवीं सदी का बताया गया है। इसलिए हमने अठारहवीं और उन्नीसवीं सदी के सिक्कों के बारे में ढूंढा।

 

भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर भारतीय सिक्के का पूरा इतिहास है। यहां कहीं भी वायरल हो रहे सिक्के नहीं दिखे। दिल्ली के नेशनल म्यूजियम के आर्कियोलॉजिस्ट और प्रवक्ता संजीव सिंह से ने इन सिक्कों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “इन सिक्कों की ऐतिहासिकता को प्रमाणित नहीं किया जा सकता। ये सिक्के कभी भी वाणिज्य के लिए उपयोग नहीं किये गए।”

 

(Demo Pic)

ये निकला नतीजा 

 

हमने अपनी पड़ताल में पाया कि भगवान राम की छवि वाला यह सिक्का कभी भी भारतीय मुद्रा का हिस्सा नहीं रहा। ये एक रामटनका या टोकन मंदिर का स्मृति चिह्न है। इस टॉकन को फर्जी कहानी बनाकर शेयर किया जा रहा है। 

 

(Demo Pic)

ये निकला नतीजा 

 

हमने अपनी पड़ताल में पाया कि भगवान राम की छवि वाला यह सिक्का कभी भी भारतीय मुद्रा का हिस्सा नहीं रहा। ये एक रामटनका या टोकन मंदिर का स्मृति चिह्न है। इस टॉकन को फर्जी कहानी बनाकर शेयर किया जा रहा है। 

 

(Demo Pic)

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