झूले में बाइक जोड़ बीवी-बच्चों को ले गया मजदूर, सामने आया लॉकडाउन में भयंकर वायरल वीडियो का सच

First Published 23, May 2020, 2:14 PM

नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए पूरे देश में 30 मई तक लॉकडाउन जारी है। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। इस बीच प्रवासी मजदूर हर राज्य से पैदल ही घरों को लौट पड़े थे। बहुत से लोग साइकिल रिक्शा से तो अधिकतर पैदल ही सड़के नाप रहे हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर एक मजदूर के जुगाड़ का वीडियो काफी वायरल हो रहा है। कई फ़ेसबुक और ट्विटर यूज़र्स ने 40 सेकेंड का एक वीडियो शेयर किया है जिसमें एक शख्स अपनी बाइक चलाते हुए उसकी मदद से फ़ेरी वाले झूले को ले जाता हुआ दिख रहा है। लोगों का दावा है कि ये लॉकडाउन में घर लौटते एक प्रवासी मजदूर का वीडियो है। 

 

फैक्ट चेकिंग में जानिए आखिर ये वीडियो कहां का है, कब का है और इसकी सच्चाई क्या है? 

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वीडियो में झूले के पहिए के पास की सीट में एक महिला सामान के साथ बैठी दिखती है। लोगों का कहना है कि,  “भारत का यह प्रवासी मजदूर अपने दिमाग के लिए जरूर एक अवॉर्ड का हक़दार है, यह आविष्कार प्रैक्टिकल और काम का जुगाड़ है कि उसने बाइक का अगला पहिया निकालकर उसे छोटे टायर्स वाले बड़े पहिए में जोड़ दिया है। उसने ऊपर सोने के लिए एक चारपाई भी रखी है।” </p>


वीडियो में झूले के पहिए के पास की सीट में एक महिला सामान के साथ बैठी दिखती है। लोगों का कहना है कि,  “भारत का यह प्रवासी मजदूर अपने दिमाग के लिए जरूर एक अवॉर्ड का हक़दार है, यह आविष्कार प्रैक्टिकल और काम का जुगाड़ है कि उसने बाइक का अगला पहिया निकालकर उसे छोटे टायर्स वाले बड़े पहिए में जोड़ दिया है। उसने ऊपर सोने के लिए एक चारपाई भी रखी है।” 

<p><strong>वायरल पोस्ट क्या है? </strong></p>

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<p>16 मई को ट्विटर यूज़र @IndurChhugani ने यह वीडियो वायरल टेक्स्ट के साथ शेयर किया और वीडियो का क्रेडिट शशि भग्नारी को दिया। इस ट्वीट को 900 से ज़्यादा बार रिट्वीट किया गया है और 48,000 से ज़्यादा बार देखा गया है। इसी तरह फेसबुक यूज़र डॉक्टर शिशिर अग्रवाल की पोस्ट को भी 1,700 से ज़्यादा बार देखा गया। </p>

वायरल पोस्ट क्या है? 

 

16 मई को ट्विटर यूज़र @IndurChhugani ने यह वीडियो वायरल टेक्स्ट के साथ शेयर किया और वीडियो का क्रेडिट शशि भग्नारी को दिया। इस ट्वीट को 900 से ज़्यादा बार रिट्वीट किया गया है और 48,000 से ज़्यादा बार देखा गया है। इसी तरह फेसबुक यूज़र डॉक्टर शिशिर अग्रवाल की पोस्ट को भी 1,700 से ज़्यादा बार देखा गया। 

<p><strong>क्या दावा किया जा रहा है? </strong></p>

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<p>लॉकडाउन में सैकड़ों मजदूर घरों को वापस लौट रहे हैं। कोई पैदल, कोई साइकिल से को कुछ न कुछ जुगाड़ करके जा रहे हैं। ऐसे ही लॉकडाउन में झूले को मोटरसाइकिल से चलाकर ले जा रहे इस जुगाड़ु मजदूरों का वायरल किया जा रहा है। लोगों का दावा है कि ये वीडियो कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन के दौरान का है। </p>

क्या दावा किया जा रहा है? 

 

लॉकडाउन में सैकड़ों मजदूर घरों को वापस लौट रहे हैं। कोई पैदल, कोई साइकिल से को कुछ न कुछ जुगाड़ करके जा रहे हैं। ऐसे ही लॉकडाउन में झूले को मोटरसाइकिल से चलाकर ले जा रहे इस जुगाड़ु मजदूरों का वायरल किया जा रहा है। लोगों का दावा है कि ये वीडियो कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन के दौरान का है। 

<p>फैक्ट चेकिंग- </p>

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<p>वीडियो सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों में बहुचत तेजी से वायरल हो रहा है। इसके बाद हमने इसकी जांच-पड़ताल करने की कोशिश की। वायरल वीडियो के पहले फ़्रेम का स्क्रीनशॉट लेकर Yandex पर रिवर्स इमेज सर्च किया और पाया कि यह वीडियो ‘टाइम फ़ॉर ऊटपटांग’ यूट्यूब चैनल पर नवंबर 2018 में अपलोड किया गया था। </p>

फैक्ट चेकिंग- 

 

वीडियो सोशल मीडिया पर बीते कुछ दिनों में बहुचत तेजी से वायरल हो रहा है। इसके बाद हमने इसकी जांच-पड़ताल करने की कोशिश की। वायरल वीडियो के पहले फ़्रेम का स्क्रीनशॉट लेकर Yandex पर रिवर्स इमेज सर्च किया और पाया कि यह वीडियो ‘टाइम फ़ॉर ऊटपटांग’ यूट्यूब चैनल पर नवंबर 2018 में अपलोड किया गया था। 

<p>2018 से इंटरनेट पर मौजूद इस वीडियो का लॉकडाउन में घर लौटते प्रवासी मजदूर से कोई लेना-देना नहीं है। इसके अलावा बाइक चलाते व्यक्ति के आस-पास पर्याप्त ट्रैफ़िक है और इसमें दिख रहे किसी भी व्यक्ति ने मास्क भी नहीं पहना है। फिर भी लोग इस वीडियो को लॉकडाउन का कहकर शेयर कर रहे हैं। </p>

2018 से इंटरनेट पर मौजूद इस वीडियो का लॉकडाउन में घर लौटते प्रवासी मजदूर से कोई लेना-देना नहीं है। इसके अलावा बाइक चलाते व्यक्ति के आस-पास पर्याप्त ट्रैफ़िक है और इसमें दिख रहे किसी भी व्यक्ति ने मास्क भी नहीं पहना है। फिर भी लोग इस वीडियो को लॉकडाउन का कहकर शेयर कर रहे हैं। 

<p><strong>ये निकला नतीजा </strong></p>

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<p>सोशल मीडिया यूज़र्स ने करीब दो-तीन साल पुराने वीडियो को प्रवासी मजदूर से जोड़कर फर्जी दावों के साथ शेयर किया है। यह बात पूरी तरह से गलत है और इससे लगता है कि यह घटना लॉकडाउन के दौरान घटी है। </p>

ये निकला नतीजा 

 

सोशल मीडिया यूज़र्स ने करीब दो-तीन साल पुराने वीडियो को प्रवासी मजदूर से जोड़कर फर्जी दावों के साथ शेयर किया है। यह बात पूरी तरह से गलत है और इससे लगता है कि यह घटना लॉकडाउन के दौरान घटी है। 

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