गजब आइडिया: फसलों को कीटों और रोगों से बचाने किसान ने देसी जुगाड़ से निकाली यह तरकीब

First Published 16, Sep 2020, 11:24 AM

झाबुआ, मध्य प्रदेश. मौसम की मार से अकसर फसलों को नुकसान पहुंचता है। कभी कीट-पतंगे, तो कभी अन्य रोग लगने से फसलें खराब हो जाती हैं। झाबुआ के रहने वाले युवा किसान मनीष सुंदरलाल पाटीदार खुद भी इसके भुक्तभोगी रहे हैं। फिर उन्होंने देसी जुगाड़ (desee jugaad)  से अपनी फसलों को सुरक्षा की चादर ओढ़ दी। किसान ने अपने खेतों को करीब 400 साड़ियों से ढंक दिया है। इससे फसलों का बचाव हो रहा है। सुंदरलाल का कहना है कि उनका यह प्रयोग सफल रहा है। अब फसलें 100 प्रतिशत सुरक्षित हैं। उनकी पैदावार (production) भी बढ़ गई है। सुंदरलाल अपने खेतों में हाईब्रिज मिर्च उगाते हैं। उनका यह प्रयोग दूसर किसानों को भी पसंद आ रहा है। किसान का मानना है कि इससे पौधों की लंबाई एक समान होगी। वे ड्रिप पद्धति से फसल को पानी दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे 2 महीने फसल को ढंककर रखेंगे। आगे पढ़िए इसी किसान की कहानी...

<p>मनीष बताते हैं कि एक बीघा में मिर्च लगाने पर जुताई पर 25 हजार रुपए का खर्च आता है। इसमें पुरानी साड़ियां लेने पर 8 हजार रुपए खर्च शामिल है। अगर किसान बाजार से रेडिमेड क्रॉप कवर खरीदेगा, तो खर्चा डबल हो जाएगा। इस प्रयोग से फसल की पैदावार बढ़ी है। उद्यानिकी विभाग के एसडीओ सुरेश इनवाती ने बताया कि इस प्रयोग से फसल में कोई बीमारी नहीं लगती। वहीं, गर्मी, ठंड और बारिश में एक-सा तापमान बना रहता है।</p>

<p><strong>आगे पढ़िए कबाड़ की जुगाड़ से 22 साल के किसान ने बना दीं कई गजब मशीनें, जानिए इनकी खूबियां</strong></p>

मनीष बताते हैं कि एक बीघा में मिर्च लगाने पर जुताई पर 25 हजार रुपए का खर्च आता है। इसमें पुरानी साड़ियां लेने पर 8 हजार रुपए खर्च शामिल है। अगर किसान बाजार से रेडिमेड क्रॉप कवर खरीदेगा, तो खर्चा डबल हो जाएगा। इस प्रयोग से फसल की पैदावार बढ़ी है। उद्यानिकी विभाग के एसडीओ सुरेश इनवाती ने बताया कि इस प्रयोग से फसल में कोई बीमारी नहीं लगती। वहीं, गर्मी, ठंड और बारिश में एक-सा तापमान बना रहता है।

आगे पढ़िए कबाड़ की जुगाड़ से 22 साल के किसान ने बना दीं कई गजब मशीनें, जानिए इनकी खूबियां

<p><strong>चित्तौड़गढ़, राजस्थान.</strong> दिमाग शॉर्प हो, तो कबाड़े का भी सदुपयोग किया जा सकता है। हर बेकार चीज असेंबल करके काम में लाई जा सकती है, कैसे? इस 22 साल के इस&nbsp;किसान से सीखिए। यह हैं नारायण लाल धाकड़। ये जिले के एक छोटे से गांव जयसिंहपुरा में रहते हैं। ये जुगाड़ तकनीक से कई ऐसी मशीनें बना चुके हैं, जो खेती-किसानी में बड़े काम आ रही हैं। ये अपने सारे आविष्कार यूट्यूब चैनल 'आदर्श किसान सेंटर' के जरिये डेमो देते हैं। इनके चैनल को लाखों लोग फॉलो करते हैं।&nbsp;नारायण ने एक मीडिया को बताया था कि जब वे 12 साल के थे, तब से खेतों पर जाने लगे थे। 12वीं की पढ़ाई के बाद वे खेती-किसानी के लिए उपकरण बनाने लगे। नील गायें किसानों के लिए बड़ी समस्या होती हैं। उन्हें मारकर भगाने का दिल नहीं करता। इसे ध्यान में रखकर नारायण ने यह उपकरण बनाया।&nbsp;<strong>आगे देखिए इन्हीं के देसी जुगाड़ वाले उपकरण...</strong></p>

चित्तौड़गढ़, राजस्थान. दिमाग शॉर्प हो, तो कबाड़े का भी सदुपयोग किया जा सकता है। हर बेकार चीज असेंबल करके काम में लाई जा सकती है, कैसे? इस 22 साल के इस किसान से सीखिए। यह हैं नारायण लाल धाकड़। ये जिले के एक छोटे से गांव जयसिंहपुरा में रहते हैं। ये जुगाड़ तकनीक से कई ऐसी मशीनें बना चुके हैं, जो खेती-किसानी में बड़े काम आ रही हैं। ये अपने सारे आविष्कार यूट्यूब चैनल 'आदर्श किसान सेंटर' के जरिये डेमो देते हैं। इनके चैनल को लाखों लोग फॉलो करते हैं। नारायण ने एक मीडिया को बताया था कि जब वे 12 साल के थे, तब से खेतों पर जाने लगे थे। 12वीं की पढ़ाई के बाद वे खेती-किसानी के लिए उपकरण बनाने लगे। नील गायें किसानों के लिए बड़ी समस्या होती हैं। उन्हें मारकर भगाने का दिल नहीं करता। इसे ध्यान में रखकर नारायण ने यह उपकरण बनाया। आगे देखिए इन्हीं के देसी जुगाड़ वाले उपकरण...

<p>देसी जुगाड़ से बनाया गया यह उपकरण ऐसी आवाज करता है कि नील गायें खेतों से भाग खड़ी होती हैं। नारायण का यह उपकरण काफी सुर्खियों में है। <strong>आगे देखिए इन्हीं के देसी जुगाड़ वाले उपकरण..</strong>.</p>

देसी जुगाड़ से बनाया गया यह उपकरण ऐसी आवाज करता है कि नील गायें खेतों से भाग खड़ी होती हैं। नारायण का यह उपकरण काफी सुर्खियों में है। आगे देखिए इन्हीं के देसी जुगाड़ वाले उपकरण...

<p>नारायण के देसी जुगाड़ की यह छोटी सी चीज खरपतवार उखाड़ने के काम आती है। <strong>आगे देखिए इन्हीं के देसी जुगाड़ वाले उपकरण...</strong></p>

नारायण के देसी जुगाड़ की यह छोटी सी चीज खरपतवार उखाड़ने के काम आती है। आगे देखिए इन्हीं के देसी जुगाड़ वाले उपकरण...

<p>फसल को साफ करने वाली यह छलनी नारायण ने घर पर ही घी के कनस्तर को काटकर तैयार कर ली।</p>

फसल को साफ करने वाली यह छलनी नारायण ने घर पर ही घी के कनस्तर को काटकर तैयार कर ली।

<p>कपास की फसल को उखाड़ना कठिन होता है। नारायण का यह उपकरण पौधे को पकड़कर आसानी से जमीन से उखाड़ देता है।</p>

कपास की फसल को उखाड़ना कठिन होता है। नारायण का यह उपकरण पौधे को पकड़कर आसानी से जमीन से उखाड़ देता है।

<p>नारायण की देसी जुगाड़ से बनी यह मशीन भारी वजन उठाकर ले जाने में काम आती है।</p>

नारायण की देसी जुगाड़ से बनी यह मशीन भारी वजन उठाकर ले जाने में काम आती है।

<p>कीड़े-मकोड़े भगाने के लिए नारायण ने लैंपनुमा यह मशीन तैयार की है।<br />
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कीड़े-मकोड़े भगाने के लिए नारायण ने लैंपनुमा यह मशीन तैयार की है।
 

<p>नारायण के पिता का इनके जन्म से पहले ही हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इनकी परवरिश मां सीतादेवी ने अकेले की। इनकी दो जुड़वां बहने हैं।</p>

नारायण के पिता का इनके जन्म से पहले ही हार्ट अटैक से निधन हो गया था। इनकी परवरिश मां सीतादेवी ने अकेले की। इनकी दो जुड़वां बहने हैं।

<p>नारायण बचपन से ही अपनी मां के साथ खेतों पर जाते थे। तब से उन्हें मिट्टी से प्रेम हो गया।&nbsp;</p>

नारायण बचपन से ही अपनी मां के साथ खेतों पर जाते थे। तब से उन्हें मिट्टी से प्रेम हो गया। 

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