- Home
- National News
- चीन की चुनौती का जवाब है भारत का यह नया एयरफ्राफ्ट कैरियर, बनाने में लगे 23 हजार करोड़, जानें इसकी खास बातें
चीन की चुनौती का जवाब है भारत का यह नया एयरफ्राफ्ट कैरियर, बनाने में लगे 23 हजार करोड़, जानें इसकी खास बातें
नई दिल्ली। चीन लगातार अपनी नौसेना की ताकत बढ़ा रहा है। हाल ही में चीन ने अपनी नौसेना में नए एयरक्राफ्ट कैरियर को शामिल किया है। भारत भी चीन से मिल रही चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी नौसेना की ताकत में इजाफा कर रहा है। इसी क्रम में भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर विक्रांत बनकर तैयार है। इसे 15 अगस्त को नौसेना में शामिल किया जा सकता है। यह एयरक्राफ्ट कैरियर चीन से मिल रही चुनौतियों का जवाब है। जानें इसके बारे में खास बातें...

विमान वाहक पोत उस समुद्री जहाज को कहते हैं, जिसपर विमान तैनात होते हैं। नौसेना ऐसे पोत पर लड़ाकू विमानों को तैनात करती है। यह समुद्र में तैरते हवाई अड्डे के रूप में काम करता है। यहां से विमान उड़ान भरकर लड़ाई करने जाते हैं और वापस लौटते हैं। भारत के पास वर्तमान में एक मात्र एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य है। विक्रांत के शामिल होने से भारतीय नौसेना के पास एयरक्राफ्ट कैरियर की संख्या दो हो जाएगी।
विक्रांत समुद्र में तैरते 18 मंजिला घर की तरह है। इसके हल (मुख्य ढांचा) के निर्माण में 21 हजार टन स्टील का इस्तेमाल हुआ है। इतना स्टील तीन एफिल टावर बनाने के लिए पर्याप्त है। इसका फ्लाइट डेट इतना बड़ा है कि फुटबॉल के दो मैदान समा जाएं। इसका हैंगर एरिया इतना बड़ा है कि 30 विमानों और हेलिकॉप्टरों को रखा जा सकता है। विमानों को फ्लाइट डेक (उड़ान भरने और लैंड करने वाली मंजिल) तक लाने के लिए दो लिफ्ट लगे हैं।
विक्रांत पर शुरू में लड़ाकू विमान मिग-29के तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही इस पर कमोव-31 और MH-60R मल्टीरोल हेलिकॉप्टर भी तैनात किए जाएंगे। इंडियन नेवी के पास लड़ाकू विमानों की संख्या सीमित है। इन्हें नौसेना अपने विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य से ऑपरेट करती है। इसके चलते विक्रांत के लिए लड़ाकू विमानों की संख्या कम पड़ रही है।
विक्रांत पर तैनाती के लिए नौसेना नए लड़ाकू विमान खरीदेगी। इसके लिए प्रक्रिया जारी है। अमेरिकी कंपनी बोइंग के F/A-18 सुपर हॉर्नेट और फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन के राफेल एम के बीच मुकाबला है। दोनों कंपनियों ने गोवा में भारतीय नौसेना के बेस पर अपने लड़ाकू विमान की क्षमता का प्रदर्शन किया है। उम्मीद है कि जल्द ही इनमें से किसी एक लड़ाकू विमान की खरीद के लिए डील हो जाएगी।
विक्रांत का वजन 40 हजार टन से अधिक है। इसे बनाने में 23 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च हुए हैं। इसकी लंबाई 262 मीटर, चौड़ाई 62 मीटर और ऊंचाई 59 मीटर है। इसका निर्माण 2009 में शुरू हुआ था। इस पोत में 2300 से अधिक कम्पार्टमेंट हैं। इस पर 1700 नौसैनिकों को तैनात किया जा सकता है। पोत पर महिला अधिकारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए खास केबिन बनाए गए हैं।
विक्रांत की अधिकतम रफ्तार 51.85 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसकी क्रूजिंग स्पीड 33 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यह पोत एक बार में 13890 किलोमीटर की यात्रा कर सकता है। इतने अधिक रेंज के चलते विक्रांत बिना रुके दुनिया के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में पहुंच सकता है।
विक्रांत के निर्माण में 76 फीसदी से अधिक भारतीय कलपूर्जों और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। इसे भारतीय नौसेना और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने मिलकर बनाया है। यह पोत 14 मंजिला है। विक्रांत भारत में बना अब तक का सबसे बड़ा युद्धपोत है।
भारत के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर का नाम आईएनएस विक्रांत था। उसे 31 जनवरी 1997 को नौसेना से सेवामुक्त किया गया था। विक्रांत 4 मार्च 1961 को नौसेना में शामिल हुआ था। 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई लड़ाई में इसने अहम रोल निभाया था। इसकी याद में देश के पहले स्वदेशी विमान वाहक पोत को विक्रांत नाम दिया गया है।
विक्रांत के निर्माण के साथ ही भारत दुनिया के उस सात खास देशों में शामिल हो गया है, जिसके पास एयरक्राफ्ट कैरियर डिजाइन करने और बनाने की क्षमता है। इन देशों के नाम अमेरिका, रूस, चीन, यूके, फ्रांस, इटली और भारत हैं। भारतीय नौसेना ने पहले यूके और रूस से एयरक्राफ्ट कैरियर खरीदा था।
National News (नेशनल न्यूज़) - Get latest India News (राष्ट्रीय समाचार) and breaking Hindi News headlines from India on Asianet News Hindi.