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आखिरी कॉल में पत्नी से कहा था-2-3 दिनों तक बिजी रहूंगा, फिर TV पर खबरें देखकर रो पड़ी वो
देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले वीर योद्धा कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत इस साल महावीर चक्र से नवाजा जाएगा। गणतंत्र दिवस पर उन्हें यह सम्मान समर्पित किया जाएगा। बता दें कि परमवीर के बाद महावीर चक्र सेना में दूसरा सबसे बड़ा सम्मान होता है। उल्लेखनीय है कि 15-16 जून, 2020 को लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में कर्नल शहीद हुए थे। इसमें दो सैनिकों भी शहीद हुए थे। कर्नल ने 14 जून, 2020 को पत्नी संतोषी को आखिरी बार कॉल किया था। उन्होंने कहा था कि वे 2-3 दिनों तक बिजी रहेगे। जब फ्री होंगे तब कॉल करेंगे। लेकिन फिर जब पत्नी ने गलवान घाटी से संबंधित टीवी पर चल रही खबरें देखीं, तो वो रो पड़ीं। पढ़िए कर्नल से जुड़ीं कुछ बातें...

कर्नल की वीरांगना संतोषी बताती हैं कि टीवी पर खबरें देखकर उनका मन संशय से भर गया था। हालांकि उन्हें उम्मीद थी कि हालात ठीक होंगे। उनके पति सबकुछ संभाल लेंगे।
कर्नल संतोष बाबू तेलंगाना के सूर्यापेट जिले के रहने वाले थे। शहादत के 18 महीने पहले ही वे लद्दाख में तैनात हुए थे। वे 18 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग आफिसर थे।
(अपने पति को अंतिम सलामी देती संतोषी, फोटो क्रेडिट-BCCL)
जिस रोज कर्नल की अंतिम यात्रा निकली थी, सारा शहर बंद हो गया था। उन्हें श्रद्धांजलि देने लोगों का हुजुम उमड़ पड़ा था।
कर्नल बाबू ने हैदराबाद के सैनिक स्कूल में पढ़ाई की थी। इसके बाद वे एनडीए में चुने गए। उनके परिवार में पत्नी और एक बेटे के अलावा बेटी है।
(आखिरी बार शहीद का चेहरा देखती संतोष)
बता दें कि भारत और चीन के बीच 45 सालों में पहली बार ऐसी हिंसक झड़प सामने आई थी। कर्नल बाबू को जब उनके 4 साल के बेटे अनिरुद्ध ने मुखाग्नि दी, तो चारों ओर भारत माता की जय और संतोष बाबू अमर रहे के नारे गूंज उठे थे।
(पत्नी और बच्चों के साथ कर्नल संतोष बाबू)
कर्नल हमेशा विषम परिस्थितियों का आसानी से सामना कर लेते थे। वे तनाव कम करने लगातार कोशिशें कर रहे थे।
(तस्वीर में अपने पति को खोने के बावजूद कर्नल की पत्नी संतोषी बेटे को गोद में लेकर पति की चिता को परिक्रमा कराते रहीं।)
जुलाई, 2020 में तेलंगाना सरकार ने कर्नल की वीरांगना संतोषी को डिप्टी कलेक्टर बनाया था। मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने खुद शहीद के घर जाकर वीरांगाना को नियुक्ति पत्र सौंपा था।
(पति को अंतिम सलामी देतीं संतोषी)
कर्नल के पिता उपेंद्रबाबू ने बताया था कि 20 साल की नौकर में पहली बार उसका तबादला गृह राज्य में होने वाला था। अपने बेटे की शहादत पर उनकी मां मंजुला को हमेशा फक्र रहेगा। यह और बात है कि अपने इकलौते बेटे को खोने का भी उन्हें गम सताता है। जब एक मां को अपने बेटे की शहादत की खबर मिली, तो उन्होंने अपनी बहू से उसे छुपाए रखा। क्योंकि वे नहीं चाहती थीं कि बहू को सदमा लगे।
(बेटे की शहाद की खबर मिलने के बावजूद उनकी मां ने बहू से बात छुपा रखी। उन्हें डर था कि कहीं बहू को गहरा सदमा न लगे।)
कर्नल संतोष बाबू ने सैनिक स्कूल से एजुकेशन पूरी करने के बाद एनडीए खड़कवासला से अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी। संतोष बाबू 2004 में कमीशंड हुए थे। इनकी पहली पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में हुई थी।
(कर्नल बाबू की अंत्येष्टि के दौरान की तस्वीर
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