पीएम मोदी का अयोध्या से है पुराना नाता, जब 29 साल पहले बोले थे-' मैं वापस आऊंगा'
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का शिलान्यास करने वाले हैं। लेकिन, उनका राम मंदिर और अयोध्या बड़ा ही पुराना नाता रहा है। वो राम मंदिर आंदोलन से शुरुआत से ही जुड़े रहे हैं। लेकिन, गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के तौर पर इस मुद्दे पर चुप्पी ही साधी रखी थी। ऐसे में आइए जानते हैं मोदी का अयोध्या और राम मंदिर से 29 साल पुराना संबंध...

1990 के शुरुआती दिनों में जब लाल कृष्ण आडवाणी ने पद यात्रा का प्रस्ताव रखा था तो पार्टी के तत्कालीन महासचिव प्रमोद महाजन ने उन्हें पद यात्रा की जगह रथ यात्रा करने का सुझाव दिया था, फिर 12 सितंबर, 2019 को बीजेपी महासचिवों की मीटिंग के बाद आडवाणी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस दिल्ली के 11 अशोक रोड पर स्थित बीजेपी मुख्यालय में बुलाई गई थी। इसके 12 दिन बाद यानी 25 सितंबर से गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के आयोध्या तक 10 हजार किमी लंबी रथ यात्रा की घोषणा कर दी।
25 सितंबर, 1990 को लालकृष्ण आडवाणी सोमनाथ पहुंचते, उससे पहले एक टोयोटा ट्रक को भगवा रंग के एक रथ में तब्दील किया जा चुका था। 25 सितंबर को सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद आडवाणी ने यात्रा शुरू कर दी थी। उस दिन ईद का त्योहार होने के कारण छुट्टी थी। इस मौके पर इतनी भीड़ जुटी कि पूरे वातावरण में उनके नारे ही गूंजने लगे।
महिलाएं अपने हाथों से सोने के कंगन उतार कर दान में देने लगीं। पुरुष आडवाणी को तलवार, छड़ी के साथ तरह-तरह के सामान भेंट करने लगे। रथ आगे बढ़ा तो आडवाणी के अगल-बगल जो दो लोग तैनात दिखे, उनमें एक थे प्रमोद महाजन और दूसरे गुजरात बीजेपी के तत्कालीन सांगठनिक सचिव नरेंद्र मोदी।
तब से अब तक नरेंद्र मोदी को वहां गए हुए करीब-करीब 29 साल 11 महीने हो गए हैं। इतने सालों के बाद नरेंद्र मोदी बतौर प्रधानमंत्री राम मंदिर भूमि पूजन करने वाले हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण 2023 तक पूरा होने की उम्मीद है। स्वाभाविक है कि इसका उद्घाटन भी प्रधानमंत्री ही करेंगे। संभव है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले राम मंदिर उद्घाटन का भव्य समारोह आयोजित किया जाए।
2009 में मोदी ने अयोध्या से सटे फैजाबाद में चुनाव प्रचार करने गए थे। तब, लोकसभा चुनाव में आडवाणी बीजेपी की तरफ से प्रधानमंत्री के उम्मीदवार थे। मोदी मतदाताओं को रिझाने में सफल नहीं हो पाए थे और अयोध्या/फैजाबाद की सीट कांग्रेस ने जीत ली थी। 2014 में फैजाबाद में चुनाव प्रचार के दौरान मोदी के पीछे तीर-धनुष लिए भगवान राम की विशाल तस्वीर लगी हुई थी। मोदी ने अपने भाषण में राम राज्य की बात की, हालांकि, राम मंदिर पर कुछ नहीं बोले।
2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी फिर फैजाबाद पहुंचे। उन्होंने अयोध्या में एक भी रैली नहीं की। प्रधानमंत्री के तौर पर अयोध्या इलाके में उनकी पहली सभा मई 2019 में अयोध्या-आंबेडकर नगर सीमा पर स्थित छोटे से शहर रामपुर माया में हुई थी। अयोध्या में रामजन्मभूमि से मुश्किल से 25 किमी दूर।
आज से ठीक 29 साल पहले राम मंदिर आंदोलन के दौरान 1991 में उन्होंने एक फोटोग्राफर से बात करते हुए कहा था कि जिस दिन राम मंदिर का निर्माण शुरू होगा, वह वापस आएंगे। सोशल मीडिया पर 1991 की मोदी और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की वायरल हो रही तस्वीर को खींचने वाले फोटोग्राफर महेंद्र त्रिपाठी ने यह खुलासा किया। त्रिपाठी उस दिन को याद करते हुए बताया, कि 'मोदी बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के साथ अप्रैल 1991 में अयोध्या आए थे और उन्होंने विवादित क्षेत्र का दौरा किया था।' 5 अगस्त ही वह दिन है जब मोदी अयोध्या वापस आने का वादा पूरा करने वाले हैं।
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