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आतंकी दहशत और कर्फ्यू के बीच हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई थी घाटी की पहली रेल, जानिए और भी फैक्ट

First Published Feb 22, 2021, 12:18 PM IST
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कोरोनाकाल के चलते सारे देश में रेल यातायात रुका हुआ था। अब 11 महीने बाद कश्मीर में सोमवार से फिर से रेल सेवा शुरू हो गई। उत्तर रेलवे ने रविवार को बारामूला से बनिहाल के बीच 137 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर ड्राई रन किया था। इसके बाद सोमवार सुबह 9.10 बजे बारामूला से बनिहाल के लिए ट्रेन रवाना की गई। वहीं, सुबह 11.25 बजे से बारामूला के लिए बनिहाल के लिए ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई। उत्तर रेलवे श्रीनगर के चीफ एरिया मैनेजर साकिब युसूफ ने यात्रियों से मास्क लगाने और दूरी रखने को कहा है। आपको पता है कि घाटी में पहली रेल कब दौड़ी थी? इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी 11 अक्टूबर, 2008 को मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने श्रीनगर के निकट नौगाम रेलवे स्टेशन से। तब यहां आतंकी घटनाओं के मद्देनजर कर्फ्यू लगा हुआ था। आइए जानते हैं जम्मू-कश्मीर में ट्रेन की कहानी...

यह तस्वीर घाटी में ट्रेन यातायात की दिक्कतों को दिखाती है। कश्मीर घाटी में अकसर बर्फबारी होती है। लेकिन आमतौर पर ट्रेनों का आवागमन नहीं रुकता। कोरोना ने इसे ब्रेक लगाया। पिछले 11 महीने से ट्रेन खड़ी थीं। अब 22 फरवरी से इनका परिचालन फिर शुरू हो गया।

(फाइल फोटो-अनंतनाग से गुजरती ट्रेन)

यह तस्वीर घाटी में ट्रेन यातायात की दिक्कतों को दिखाती है। कश्मीर घाटी में अकसर बर्फबारी होती है। लेकिन आमतौर पर ट्रेनों का आवागमन नहीं रुकता। कोरोना ने इसे ब्रेक लगाया। पिछले 11 महीने से ट्रेन खड़ी थीं। अब 22 फरवरी से इनका परिचालन फिर शुरू हो गया।

(फाइल फोटो-अनंतनाग से गुजरती ट्रेन)

11 अक्टूबर, 2008 को मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह घाटी की पहली ट्रेन को नौगाम रेलवे स्टेशन पर हरी झंडी दिखाई थी। यह रेलवे लाइन 66 किमी है। इसे अपनी दूरी तय करने में औसत 1 घंटे 35 मिनट लगता है।

11 अक्टूबर, 2008 को मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह घाटी की पहली ट्रेन को नौगाम रेलवे स्टेशन पर हरी झंडी दिखाई थी। यह रेलवे लाइन 66 किमी है। इसे अपनी दूरी तय करने में औसत 1 घंटे 35 मिनट लगता है।

जहां तक कमर्शियल स्तर पर जम्मू-कश्मीर में रेलवे की बात है, तो 1897 में जम्मू-सियालकोट रेलमार्ग पर करीब 43 किमी लंबी पहली पंजाब से जम्मू जाने वाली सबसे छोटी रेलवे लाइन बिछाई गई थी। इसके जरिये शक्कर आदि चीजें भेजी जाती थीं। चूंकि यह ट्रेन सियालकोट, वजीराबाद(दोनों पाकिस्तान में) से होकर कश्मीर जाती थी, इसलिए बंटवारे के बाद इसे बंद करना पड़ा।

जहां तक कमर्शियल स्तर पर जम्मू-कश्मीर में रेलवे की बात है, तो 1897 में जम्मू-सियालकोट रेलमार्ग पर करीब 43 किमी लंबी पहली पंजाब से जम्मू जाने वाली सबसे छोटी रेलवे लाइन बिछाई गई थी। इसके जरिये शक्कर आदि चीजें भेजी जाती थीं। चूंकि यह ट्रेन सियालकोट, वजीराबाद(दोनों पाकिस्तान में) से होकर कश्मीर जाती थी, इसलिए बंटवारे के बाद इसे बंद करना पड़ा।

यह तस्वीर जम्मू के विक्रम चौक स्थित रेलवे स्टेशन की है। इसे वर्ष, 2000 में म्यूजियम बनाने के लिए बंद कर दिया गया था।

यह तस्वीर जम्मू के विक्रम चौक स्थित रेलवे स्टेशन की है। इसे वर्ष, 2000 में म्यूजियम बनाने के लिए बंद कर दिया गया था।

और अगले साल जम्मू से कश्मीर तक चलेगी ट्रेन
अभी घाटी में ट्रेनें अंदर ही चलती हैं। यानी उनका जुड़ाव जम्मू के जरिये देश के अन्य स्टेशन तक नहीं है। लेकिन रेलवे का मानना है कि दिसंबर, 2020 तक जम्मू से बारामूला तक रेलवे लाइन बिछ जाएगी। दरअसल, इस ट्रेक में चेनाब नदी आती है। इस पर 359 मीटर पुल बनाया जा रहा है।

और अगले साल जम्मू से कश्मीर तक चलेगी ट्रेन
अभी घाटी में ट्रेनें अंदर ही चलती हैं। यानी उनका जुड़ाव जम्मू के जरिये देश के अन्य स्टेशन तक नहीं है। लेकिन रेलवे का मानना है कि दिसंबर, 2020 तक जम्मू से बारामूला तक रेलवे लाइन बिछ जाएगी। दरअसल, इस ट्रेक में चेनाब नदी आती है। इस पर 359 मीटर पुल बनाया जा रहा है।

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