Asianet News Hindi

मामूली पढ़े-लिखे इस किसान ने ट्रैक्टर के लिए तैयार की ऐसी जुगाड़ कि इंजीनियर भी हैरान रह गए

First Published Sep 1, 2020, 4:03 PM IST
  • Facebook
  • Twitter
  • Whatsapp

बोताड, गुजरात. सोच-विचार पढ़ाई-लिखाई की मोहताज नहीं होती। अगर आपके दिमाग में नये-नये आइडियाज आते हैं और आप उन्हें लेकर प्रयोग करते हैं, तो आप इंजीनियरों पर भारी पड़ सकते हैं। बोताड जिले के रहने वाले 49 वर्षीय जतिन राठौर ऐसे ही शख्स हैं, जो पढ़े तो महज 7वीं क्लास हैं, लेकिन काम इंजीनियरों के करते हैं। इन्होंने एक ऐसी जुगाड़ बनाई है, जिसकी सहायता से ट्रैक्टर को जमीन से सुविधानुसार ऊपर उठा सकते हैं। यह जुगाड़ फसलों की ऊंचाई को देखते हुए बनाई गई है। यानी आपको ट्रैक्टर के जरिये दवा का छिड़काव करना हो या निराई-गुड़ाई...अब अप बेफिक्र होकर ट्रैक्टर को खेत में उतार सकते हैं। ट्रैक्टर को जुगाड़ के जरिये ऊंचा करने से फसलों के कुचलकर खराब होने की आशंका खत्म हो जाती है। पढ़िये एक देसी जुगाड़ की कहानी...

जतिन ने हाल में दबेटरइंडिया नामक वेबसाइट को एक इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने बताया कि आमतौर पर छोटे ट्रैक्टरों के लिए उनका जुगाड़ वाला सिस्टम काफी फायदेमंद है।  जतिन के पिता टैम्पो बनाते थे। इनके घर में ही वर्कशॉप थी। जब जतिन 7वीं पढ़ रहे थे, तब इनके पिता की तबीयत बिगड़ी। हालत इतनी खराब हो गई कि जतिन को स्कूल छोड़कर वर्कशॉप का काम संभालना पड़ा। पिताजी के निधन के बाद जतिन ने टैम्पो के बजाय छोटे आकार के ट्रैक्टर बनाना शुरू किया। इस तरह उन्होंने 1995 में पहला छोटा ट्रैक्टर बनाया।

जतिन ने हाल में दबेटरइंडिया नामक वेबसाइट को एक इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने बताया कि आमतौर पर छोटे ट्रैक्टरों के लिए उनका जुगाड़ वाला सिस्टम काफी फायदेमंद है।  जतिन के पिता टैम्पो बनाते थे। इनके घर में ही वर्कशॉप थी। जब जतिन 7वीं पढ़ रहे थे, तब इनके पिता की तबीयत बिगड़ी। हालत इतनी खराब हो गई कि जतिन को स्कूल छोड़कर वर्कशॉप का काम संभालना पड़ा। पिताजी के निधन के बाद जतिन ने टैम्पो के बजाय छोटे आकार के ट्रैक्टर बनाना शुरू किया। इस तरह उन्होंने 1995 में पहला छोटा ट्रैक्टर बनाया।

जतिन ने बताया कि किसानों की एक आम समस्या थी। फसल बड़ी होने पर खेत में ट्रैक्टर नहीं उतार सकते थे। लिहाजा उन्होंने ट्रैक्टर के लिए एक ऐसा बेस तैयार किया, जिसके जरिये ट्रैक्टर की हाइट बढ़ाई जा सकती है।

जतिन ने बताया कि किसानों की एक आम समस्या थी। फसल बड़ी होने पर खेत में ट्रैक्टर नहीं उतार सकते थे। लिहाजा उन्होंने ट्रैक्टर के लिए एक ऐसा बेस तैयार किया, जिसके जरिये ट्रैक्टर की हाइट बढ़ाई जा सकती है।

जतिन के बनाए ट्रैक्टर की वीडियो देखकर बेंगुलुरु की विटीएस मित्सुबिशी कंपनी ने संपर्क किया। अब वे उसके साथ ट्रैक्टर बना रहे हैं। उनका यह प्रयोग गुजरात के अलावा कर्नाटक, आंधप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र आदि राज्यों में खूब सराहा गया। वे बताते हैं कि अगर आपके पास 15-20 एचपी का ट्रैक्टर है, तो इस सिस्टम पर 45 हजार रुपए का खर्चा आएगा। इससे ज्यादा एचपी का ट्रैक्टर होने पर 65-75 हजार रुपए। किसान उनसे संपर्क करना चाहें, तो नंबर है-9574692007
आगे पढ़ें...इंजीनियर नहीं तो क्या, ट्रैक्टर के पुराने टायर का और क्या इस्तेमाल हो सकता है, कोई इनसे सीखे

जतिन के बनाए ट्रैक्टर की वीडियो देखकर बेंगुलुरु की विटीएस मित्सुबिशी कंपनी ने संपर्क किया। अब वे उसके साथ ट्रैक्टर बना रहे हैं। उनका यह प्रयोग गुजरात के अलावा कर्नाटक, आंधप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र आदि राज्यों में खूब सराहा गया। वे बताते हैं कि अगर आपके पास 15-20 एचपी का ट्रैक्टर है, तो इस सिस्टम पर 45 हजार रुपए का खर्चा आएगा। इससे ज्यादा एचपी का ट्रैक्टर होने पर 65-75 हजार रुपए। किसान उनसे संपर्क करना चाहें, तो नंबर है-9574692007
आगे पढ़ें...इंजीनियर नहीं तो क्या, ट्रैक्टर के पुराने टायर का और क्या इस्तेमाल हो सकता है, कोई इनसे सीखे

भिवानी, हरियाणा. जब बिजली से चलने वाली मशीन से चारा काटा जाता है, तो चारे के कण हवा में उड़ने लगते हैं। यह सिर्फ न पॉल्युशन फैलाते हैं, बल्कि सांस के जरिये चारा काटने वाले के फेफड़ों में जाकर बीमारी भी पैदा कर सकते हैं। यही नहीं, असावधानी से अगर मशीन के ब्लेड के पास आ गए, तो शरीर कटने का डर भी बना रहता है। इस किसान ने इसका देसी जुगाड़ निकाला। उसने मशीन के ब्लेड वाले हिस्से को ट्रैक्टर के पुराने टायर से कवर कर दिया। इससे अब न चारा हवा में उड़ता है और न दुर्घटना का खतरा। यह हैं बलियाली के किसान बलविंद्र। बलविंद्र अकसर कृषि मेलों में जाते रहे हैं। यहां तरह-तरह के मशीनों को देखकर उनके मन में कुछ अलग करने का विचार आता रहा। उन्होंने सबसे पहले अपने घर में यह प्रयोग किया। उनका यह देसी जुगाड़ दूसरे पशु पालकों को भी पसंद आ रहा है। आगे पढ़िए...11वीं पास किसान चलाता है देसी जुगाड़ वाला वर्कशॉप, मशीनें बेचकर कमाता है 2 करोड़ सालाना
 

भिवानी, हरियाणा. जब बिजली से चलने वाली मशीन से चारा काटा जाता है, तो चारे के कण हवा में उड़ने लगते हैं। यह सिर्फ न पॉल्युशन फैलाते हैं, बल्कि सांस के जरिये चारा काटने वाले के फेफड़ों में जाकर बीमारी भी पैदा कर सकते हैं। यही नहीं, असावधानी से अगर मशीन के ब्लेड के पास आ गए, तो शरीर कटने का डर भी बना रहता है। इस किसान ने इसका देसी जुगाड़ निकाला। उसने मशीन के ब्लेड वाले हिस्से को ट्रैक्टर के पुराने टायर से कवर कर दिया। इससे अब न चारा हवा में उड़ता है और न दुर्घटना का खतरा। यह हैं बलियाली के किसान बलविंद्र। बलविंद्र अकसर कृषि मेलों में जाते रहे हैं। यहां तरह-तरह के मशीनों को देखकर उनके मन में कुछ अलग करने का विचार आता रहा। उन्होंने सबसे पहले अपने घर में यह प्रयोग किया। उनका यह देसी जुगाड़ दूसरे पशु पालकों को भी पसंद आ रहा है। आगे पढ़िए...11वीं पास किसान चलाता है देसी जुगाड़ वाला वर्कशॉप, मशीनें बेचकर कमाता है 2 करोड़ सालाना
 

जोधपुर, राजस्थान. 11वीं पास इस इस किसान ने अपना खुद का एक वर्कशॉप बनाया हुआ है। इसमें देसी तकनीक से खेती-किसानी से जुड़ीं मशीनें तैयार करते हैं। इनकी डिमांड देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा दूसरे देशों से भी आने लगी है। यह हैं जोधपुर जिले के मथानिया में वर्कशॉप चलाने वाले अरविंद सांखला। बताते हैं कि ये इनका सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। ये खेती-किसानी के काम आने वाले हर तरह के सस्ते उपकरण बनाते हैं।

जोधपुर, राजस्थान. 11वीं पास इस इस किसान ने अपना खुद का एक वर्कशॉप बनाया हुआ है। इसमें देसी तकनीक से खेती-किसानी से जुड़ीं मशीनें तैयार करते हैं। इनकी डिमांड देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा दूसरे देशों से भी आने लगी है। यह हैं जोधपुर जिले के मथानिया में वर्कशॉप चलाने वाले अरविंद सांखला। बताते हैं कि ये इनका सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा का है। ये खेती-किसानी के काम आने वाले हर तरह के सस्ते उपकरण बनाते हैं।

Follow Us:
Download App:
  • android
  • ios