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12 साल की बेटी ने PM मोदी को लिखा भावुक खत, देश के सभी बच्चों की जान खतरे में है..प्लीज सर कुछ कीजिए

First Published Sep 8, 2020, 11:15 AM IST
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हरिद्वार (उत्तराखंड). प्रदूषण और पर्यावरण संरक्षण आज हर देश के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है। क्लाइमेट चेंज ना सिर्फ पर्यावरण पर असर पड़ रहा है बल्कि यह सेहत पर भी असर डाल रहा है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की जिंदगी खतरे में डाल रहा है। प्रदूषित हवा चिंतित से उत्तराखंड की 12 साल की बेटी रिद्धिमा ने प्रधानमंत्री मोदी को एक चिट्टी लिखी है। जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। बच्ची ने पीएम से पत्र के जरिए बढ़ते वायु प्रदूषण के खिलाफ तत्काल कदम उठाने की मांग की है।


सोशल साइट पर शेयर की यह चिट्टी
रिद्धिमा रिद्वार की रहने वाली है वह पर्यावरण एक्टिविस्ट है। उसने पहले इंटरनेशनल क्लीन एयर डे फॉर ब्लू स्काई के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सभी बच्चों की तरफ से पीएम एक खुला खत लिखा है। जिसमें उसने  शुद्ध हवा की मांग है। इस लिखी चिट्ठी की एक कॉपी  उसने अपने  फेसबुक उकाउंट और ट्विटर पर शेयर की है। 


सोशल साइट पर शेयर की यह चिट्टी
रिद्धिमा रिद्वार की रहने वाली है वह पर्यावरण एक्टिविस्ट है। उसने पहले इंटरनेशनल क्लीन एयर डे फॉर ब्लू स्काई के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सभी बच्चों की तरफ से पीएम एक खुला खत लिखा है। जिसमें उसने  शुद्ध हवा की मांग है। इस लिखी चिट्ठी की एक कॉपी  उसने अपने  फेसबुक उकाउंट और ट्विटर पर शेयर की है। 


बच्चों को चलना पड़ेगा ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर
12 साल की पर्यावरण एक्टिविस्ट ने अपने खत में लिखा-पीएम मोदी जी अगर पर्यावरण के लिए कुछ नहीं किया गया तो एक दिन सभी को ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलना पड़ेगा। रिद्धिमा ने लिखा कि देश के बड़े शहरों जैसे-दिल्ली-मुंबई और चेन्नई जैसे घने शहरों में प्रदूषण के कारण अक्टूबर के बाद सांस लेना मुश्किल हो जाता है। एसलिए आप से निवेदन है कि तत्काल इस पर ध्यान दीजिए। 


बच्चों को चलना पड़ेगा ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर
12 साल की पर्यावरण एक्टिविस्ट ने अपने खत में लिखा-पीएम मोदी जी अगर पर्यावरण के लिए कुछ नहीं किया गया तो एक दिन सभी को ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलना पड़ेगा। रिद्धिमा ने लिखा कि देश के बड़े शहरों जैसे-दिल्ली-मुंबई और चेन्नई जैसे घने शहरों में प्रदूषण के कारण अक्टूबर के बाद सांस लेना मुश्किल हो जाता है। एसलिए आप से निवेदन है कि तत्काल इस पर ध्यान दीजिए। 

संयुक्त राष्ट्र में भी  शिकायत दर्ज करा चुकी हैं रिद्धिमा
बता दें कि हरिद्वार की युवा जलवायु एक्टिविस्ट रिद्धिमा ग्रेटा थनबर्ग के साथ उन 16 बच्चों में शामिल रही हैं जिन्होंने जलवायु परिवर्तन पर सरकारी कार्रवाई की कमी के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के क्लाइमेट एक्शन समिट में शिकायत दर्ज कराई थी।

संयुक्त राष्ट्र में भी  शिकायत दर्ज करा चुकी हैं रिद्धिमा
बता दें कि हरिद्वार की युवा जलवायु एक्टिविस्ट रिद्धिमा ग्रेटा थनबर्ग के साथ उन 16 बच्चों में शामिल रही हैं जिन्होंने जलवायु परिवर्तन पर सरकारी कार्रवाई की कमी के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र के क्लाइमेट एक्शन समिट में शिकायत दर्ज कराई थी।

रिद्धिमा ने सुनाया अपना एक किस्सा
रिद्धिमा ने वीडियो के जरिए एक किस्सा भी सुनाया।  ''कहा एक दिन मैंने अपने टीचर से कहा कि मैं स्कूल एक ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ आ रही हूं, क्योंकि हवा बहुत प्रदूषित हो चुकी है। यह बुरा सपना अभी भी मेरी सबसे बड़ी चिंता है क्योंकि प्रदूषित हवा आज हमारे देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। मुझे चिंता है कि अगर मेरे जैसे 12 साल के बच्चे को सांस लेने में मुश्किल होती है, तो अत्यधिक प्रदूषण वाले दिल्ली एवं अन्य शहरों में रहने वाले छोटे बच्चों का क्या हाल होता होगा।

रिद्धिमा ने सुनाया अपना एक किस्सा
रिद्धिमा ने वीडियो के जरिए एक किस्सा भी सुनाया।  ''कहा एक दिन मैंने अपने टीचर से कहा कि मैं स्कूल एक ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ आ रही हूं, क्योंकि हवा बहुत प्रदूषित हो चुकी है। यह बुरा सपना अभी भी मेरी सबसे बड़ी चिंता है क्योंकि प्रदूषित हवा आज हमारे देश की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। मुझे चिंता है कि अगर मेरे जैसे 12 साल के बच्चे को सांस लेने में मुश्किल होती है, तो अत्यधिक प्रदूषण वाले दिल्ली एवं अन्य शहरों में रहने वाले छोटे बच्चों का क्या हाल होता होगा।

बता दें कि 12 साल की रिद्धिमा  साफ हवा के लिए  हाल ही कि दिनों में ऑनलाइन आंदोलन भी कर चुकी हैं। उनका साथ कई सामाजिक संस्थाओं ने दिया था।

बता दें कि 12 साल की रिद्धिमा  साफ हवा के लिए  हाल ही कि दिनों में ऑनलाइन आंदोलन भी कर चुकी हैं। उनका साथ कई सामाजिक संस्थाओं ने दिया था।

समय-समय पर रिद्धिमा पर्यावरण के लिए मुहिम चलाती रहती हैं। उनका कहना है कि हम गंगा को अपनी मां कहते हैं लेकिन रोजाना इसमें मूर्तियां, कपड़े, प्लास्टिक की थैलियां फैंकी जाती है। ना ही तो सरकार और ना ही लोग इसका स्वच्छता की ओर ध्यान दे रहे हैं।

समय-समय पर रिद्धिमा पर्यावरण के लिए मुहिम चलाती रहती हैं। उनका कहना है कि हम गंगा को अपनी मां कहते हैं लेकिन रोजाना इसमें मूर्तियां, कपड़े, प्लास्टिक की थैलियां फैंकी जाती है। ना ही तो सरकार और ना ही लोग इसका स्वच्छता की ओर ध्यान दे रहे हैं।


रिद्धिमा का लोगों से कहना है कि प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करें। धुएं वाले वाहनों की बजाए साइकिल यूज करें।


रिद्धिमा का लोगों से कहना है कि प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करें। धुएं वाले वाहनों की बजाए साइकिल यूज करें।

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