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कौन हैं गुलालई इस्माइल, जिन्होंने US में खोली पाक सेना के अत्याचार की पोल

First Published Sep 28, 2019, 2:33 PM IST
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महिला मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालई इस्माइल पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के लिए उम्मीद का नया चेहरा बन गई हैं। इस्माइल लंबे वक्त से पाकिस्तान में छिपी थीं, हाल ही में वे वहां से निकलने में कामयाब हुई हैं और अमेरिका में राजनीतिक शरण मांग रही हैं। 

इस्माइल पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहीं हैं। शुक्रवार को न्यूयॉर्क की सड़कों पर उन्हें उन लोगों में देखा गया, जो पाकिस्तानी सेना क अत्याचारों का विरोध करने के सड़कों पर उतरे थे।

इस्माइल पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहीं हैं। शुक्रवार को न्यूयॉर्क की सड़कों पर उन्हें उन लोगों में देखा गया, जो पाकिस्तानी सेना क अत्याचारों का विरोध करने के सड़कों पर उतरे थे।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में किस तरह से अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार हो रहे हैं। इस्माइल ने बताया कि पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने के नाम पर मासूम पश्तूनों की हत्या की जा रही है। हजारों लोगों को बंधक बनाकर रखा गया है। इनमें से कुछ जेल में हैं, कुछ को आर्मी द्वारा बनाए गए टॉर्चर सेल में रखा जाता है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में किस तरह से अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार हो रहे हैं। इस्माइल ने बताया कि पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाने के नाम पर मासूम पश्तूनों की हत्या की जा रही है। हजारों लोगों को बंधक बनाकर रखा गया है। इनमें से कुछ जेल में हैं, कुछ को आर्मी द्वारा बनाए गए टॉर्चर सेल में रखा जाता है।

उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि पाकिस्तान में सेना द्वारा हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन को रोका जाना चाहिए। अगर सेना के अत्याचार के खिलाफ कोई बोलता है तो उसे आतंकी घोषित कर दिया जाता है। पाकिस्तानी सेना ने खैबर पख्तूनख्वा में तानाशाही लगाकर रखी है।

उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि पाकिस्तान में सेना द्वारा हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन को रोका जाना चाहिए। अगर सेना के अत्याचार के खिलाफ कोई बोलता है तो उसे आतंकी घोषित कर दिया जाता है। पाकिस्तानी सेना ने खैबर पख्तूनख्वा में तानाशाही लगाकर रखी है।

पिछले महीने अमेरिका पहुंची 32 साल की गुलालई अपनी बहन के साथ न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में रह रही हैं। नवंबर 2018 में उनके खिलाफ आईएसआई ने देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था। इसके बाद इस्लामाबाद हाईकोर्ट से उन्हें एक्जिट कंट्रोल लिस्ट (ब्लैकलिस्ट) में डालने की मांग की गई थी।

पिछले महीने अमेरिका पहुंची 32 साल की गुलालई अपनी बहन के साथ न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में रह रही हैं। नवंबर 2018 में उनके खिलाफ आईएसआई ने देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था। इसके बाद इस्लामाबाद हाईकोर्ट से उन्हें एक्जिट कंट्रोल लिस्ट (ब्लैकलिस्ट) में डालने की मांग की गई थी।

गुलालई को अभी भी अपने परिवार और उनकी पाकिस्तान से भागने में मदद करने वालों की चिंता है, जो अभी भी वहां हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने उनकी आवाज को दबाने के लिए अपनी पूरी मशीनरी पीछे लगा दी थी।

गुलालई को अभी भी अपने परिवार और उनकी पाकिस्तान से भागने में मदद करने वालों की चिंता है, जो अभी भी वहां हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने उनकी आवाज को दबाने के लिए अपनी पूरी मशीनरी पीछे लगा दी थी।

गुलालई ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वे पाकिस्तान छोड़ने से पहले 6 महीने तक वहां छिपी रही थीं। इसके बाद वे अपने दोस्तों की मदद से वहां से श्रीलंका पहुंचीं थीं। इसके बाद यहां से न्यूयॉर्क पहुंचीं।

गुलालई ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि वे पाकिस्तान छोड़ने से पहले 6 महीने तक वहां छिपी रही थीं। इसके बाद वे अपने दोस्तों की मदद से वहां से श्रीलंका पहुंचीं थीं। इसके बाद यहां से न्यूयॉर्क पहुंचीं।

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