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दिल्ली में जन्में, 1999 में बिना खून बहाए हथियाई सत्ता; मुशर्रफ की पाकिस्तान में राज करने की कहानी
इस्लामाबाद. पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को एक विशेष अदालत ने फांसी की सजा दी है। मुशर्रफ अभी दुबई में हैं, वे अपना इलाज करा रहे हैं। मुशर्रफ को नवंबर 2007 में इमरजेंसी लगाने के मामले में राजद्रोह के केस में दोषी पाया गया है। मुशर्रफ 1999 में करगिल युद्ध के वक्त पाकिस्तान के आर्मी चीफ थे।
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दिल्ली में हुआ था जन्म: मुशर्रफ का जन्म आजादी से पहले 11 अगस्त 1943 में दिल्ली के दरियागंज में हुआ था। दिल्ली में नहर वाली हवेली में उनका परिवार रहता था। 1947 के बंटवारे के बाद उनका परिवार पाकिस्तान चला गया। उनके पिता जो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़े थे, उन्होंने पाकिस्तान सरकार में नौकरी करनी शुरू कर दी।
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मुशर्रफ 1961 में पाकिस्तान की सेना में शामिल हुए। वे एक शानदार खिलाड़ी रहे हैं। मुशर्रफ ने भारत के खिलाफ 1965 में अपना पहला युद्ध लड़ा। उन्हें इसके लिए वीरता का पुरस्कार भी मिला। 1998 में मुशर्रफ जनरल बने। उन्होंने 1999 में बिना खून बहाए सत्ता हासिल की। जब उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने पद से हटाने की कोशिश की, तो उन्होंने सेना के साथ मिलकर तख्तापलट कर दिया।
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मई 2000 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा चुनाव कराने का आदेश दिया। 2002 में हुए आम चुनाव में मुशर्रफ को बहुमत मिला। हालांकि, विपक्ष ने उनपर धांधली का आरोप लगाया। अफगानिस्तान में आंतकवाद के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का मुशर्रफ ने समर्थन किया।
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6 अक्टूबर 2007 में दोबारा राष्ट्रपति बने। उन्होंने 3 नवंबर को आपातकाल लागू कर दिया। 24 नंवबर को मुशर्रफ ने सेना की वर्दी त्यागकर पाकिस्तान के असैनिक राष्ट्रपति के तौर पर पद संभाला। लेकिन 2008 में बनी नई सरकार ने परवेज मुशर्रफ पर महाभियोग का फैसला किया। इसके बाद मुशर्रफ ने 18 अगस्त 2008 को इस्तीफा देने का ऐलान किया। मार्च 2016 में पाकिस्तान छोड़ दिया और दुबई चले गए।
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