उज्जैन. वैज्ञानिक नजरिए से ये ग्रहण एक खगोलीय घटना है।  काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्रा के अनुसार, उपच्छाया ग्रहण होने से इसका कोई सूतक काल नहीं होगा। कार्तिक महीने की पूर्णिमा पर उपच्छाया चंद्र ग्रहण वृष राशि और रोहिणी नक्षत्र में लगेगा, जिसका अशुभ असर वृष, मिथुन, सिंह, कन्या और धनु राशि वाले लोगों पर रहेगा। वहीं मेष, कर्क, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन राशि वाले लोग अशुभ प्रभाव से बच जाएंगे।

कहां और कब दिखेगा ये ग्रहण?

उत्तरी, दक्षिणी अमेरिका, प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलिया और एशिया महाद्वीप के पूर्वी भाग में इस चंद्रग्रहण को देखा जा सकेगा। इस ग्रहण का समय भारतीय समयानुसार दोपहर करीब 1:04 बजे छाया से पहला स्पर्श। दोपहर 3:13 पर परम ग्रास चंद्रग्रहण होगा। शाम 5:22 पर उपच्छाया से आखिरी स्पर्श होगा।

क्या होता है उपच्छाया चंद्रग्रहण?

पूर्ण और आंशिक ग्रहण के अलावा एक उपच्छाया ग्रहण भी होता है। ऐसे चंद्र ग्रहण में चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया न पड़कर उसकी उपच्छाया पड़ती है, जिसे खगोलीय यंत्रों के जरिये देखा जा सकता है। इस घटना में पृथ्वी की उपच्छाया में प्रवेश करने से चंद्रमा की छवि धूमिल दिखाई देती है। चन्द्रग्रहण जब शुरू होता है तो पहले चंद्रमा पृथ्वी की परछाई में प्रवेश करता है, जिससे चंद्रमा धुंधला दिखता है।

साल का आखिरी चंद्रग्रहण

30 नवंबर को होने वाला साल का आखिरी चंद्रग्रहण रहेगा। इससे पहले ऐसा ही ग्रहण 5 जुलाई को हुआ था, जो भारत में नहीं दिखा था। वहीं, 5-6 जून और 10-11 जनवरी की रात हुए चंद्रग्रहण पूरे देश में दिखाई दिए थे। इस तरह सालभर में चार चंद्रग्रहण हुए।

कार्तिक पूर्णिमा पर इस बार विशेष संयोग

पं. मिश्र बताते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर, सोमवार को है। ये कार्तिक महीने का आखिरी दिन होता है। स्नान और दान के लिहाज से यह दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। सर्वार्थसिद्धि योग व वर्धमान योग इस बार कार्तिक पूर्णिमा के दिन रहेंगे। ये दो शुभ संयोग इस पूर्णिमा को औऱ भी खास बना रहे हैं।

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