ग्वालियर. यह खबर वाकई हैरान करने वाली है कि दुनियाभर में सरोद वादन के जरिये हिंदुस्तानी कला-संगीत का परचम फहराने वाले उस्ताद अमजद अली खां आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। ग्वालियर आए उस्ताद ने एक मीडिया हाउस से चर्चा के दौरान अपनी आपबीती बताई। खां साहब ग्वालियर स्थित 'सरोद घर' की जर्जर होती हालत को लेकर दुखी हैं। वे बताते हैं कि मरम्मत के लिए करीब 5 करोड़ रुपए की जरूरत है। खां साहब ने मप्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व केंद्रीय ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित तमाम उद्योगपतियों से मदद की गुहार लगाई है।

कपिल के शो में आना भी खां साहब की मजबूरी
पिछले दिनों उस्ताद अमजद अली खां अपने दोनों बेटों अयान और अमान के संग कपिल शर्मा के शो पर पहुंचे थे। माना जा रहा है कि पैसों की जुगाड़ की खातिर उस्ताद ने इस शो के लिए रजामंदी दे दी थी। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं होती।

ग्वालियर राजघराने से रहा है गहरा नाता..
उस्ताद अमजद अली खां मूलत: ग्वालियर से ही हैं। जहां आज सरोद घर बनाया गया है, उस्ताद का वहीं जन्म हुआ था। उनके पिता उस्ताद हाफिज अली खां साहब भी वहीं पैदा हुए थे। सरोदघर में हाफिज साब की प्रतिमा लगाई गई है। उस्ताद हाफिज अली खां साहब महाराजा सिंधिया के कोर्ट म्यूजिशियन थे। 1957 में अमजद साहब का परिवार ग्वालियर से दिल्ली जाकर बस गया था। उस्ताद अमजद अली खां ने माधवगंज मिडिल स्कूल और गोरखी स्कूल में पढ़ाई-लिखाई की। 

18  वर्ष में की थी पहली विदेश यात्रा
उस्ताद अमजद अली खां ने 12 वर्ष की उम्र अपनी पहली प्रस्तुति दी थी। उनका विवाह भरतनाट्यम नृत्यांगना शुभलक्ष्मी के साथ हुआ था। खां साहब ने 1963 में 18 वर्ष की आयु में पहली अपनी सांगीतिक विदेश यात्रा की थी। उन्होंने पंडित बिरजू महाराज के नृत्य-दल के साथ सरोद वादन पेश किया था।

कई अवार्ड मिले
उस्ताद अमजद अली खां को 1975 में पद्मश्री, 1989 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 1989 तानसेन सम्मान, 1991 में पद्म भूषण, 2001 में पद्म विभूषण सहित यूनेस्को पुरस्कार और कला रत्न जैसे बड़े पुरस्कार मिल चुके हैं।