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महाराष्ट्र में गुटखा खाने पर प्रतिबंध, सिनेमाघरों में राष्ट्रगीत से लाइमलाइट में रह चुके हैं देशमुख

महाराष्ट्र में गृहमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले एनसीपी के ताकतवर नेता अनिल देशमुख विवाद से पहले भी चर्चा में रह चुके हैं। कभी महाराष्ट्र में गुटखा पर प्रतिबंध लगाकर सुर्खियां बटोरी तो कभी राष्ट्रगान के मामले में लेकिन पहली बार विवाद के चलते इस्तीफा देना पड़ा।
 

Anil Deshmukh was in limelight many times for his unique and weired decisions also DHA
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Mumbai, First Published Apr 5, 2021, 4:58 PM IST
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मुंबई। महाराष्ट्र में गृहमंत्री पद से इस्तीफा देने वाले एनसीपी के ताकतवर नेता अनिल देशमुख विवाद से पहले भी चर्चा में रह चुके हैं। कभी महाराष्ट्र में गुटखा पर प्रतिबंध लगाकर सुर्खियां बटोरी तो कभी राष्ट्रगान के मामले में लेकिन पहली बार विवाद के चलते इस्तीफा देना पड़ा।

जब लगाया था गुटखा पर प्रतिबंध

सत्तर के दशक से जिला परिषद के चुनाव से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले एनसीपी नेता अनिल देशमुख मंत्री के रूप में एक कठोर निर्णय लेकर सुर्खियां बटोरी थी। देशमुख ने पूरे महाराष्ट्र में गुटखा खाने पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रतिबंध तोड़ने वालों पर जुर्माना सरकार ने तय कर दिया। इस निर्णय काफी सराहना के साथ साथ आलोचना भी काफी हुई। गुटखा उद्यमियों ने मोर्चा खोल दिया था।
गुटखा प्रतिबंध के अलावा अनिल देशमुख एक बार और सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने महाराष्ट्र के सिनेमाघरों में राष्ट्रगीत अनिवार्य कर दिया था। 

आज ही दिए हैं इस्तीफा 

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने अपने पद से आज ही इस्तीफा दिया है। बांबे हाईकोर्ट द्वारा गृहमंत्री के खिलाफ सीबीआई से प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मांगे जाने के बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई थी। देशमुख पर इस्तीफा का दबाव बढ़ गया था। पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने देशमुख पर पुलिस विभाग से सौ करोड़ रुपये उगाही का लक्ष्य देने का आरोप लगाया था। 

महाराष्ट्र के ताकतवर नेता हैं देशमुख

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के ताकतवर नेताओं में अनिल देशमुख शुमार हैं। पांचवी बार से विधायक चुने जा रहे अनिल देशमुख एनसीपी कोटे से महाविकास आघाड़ी गठबंधन वाली महाराष्ट्र सरकार में गृहमंत्री हैं। विदर्भ क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले 70 वर्षीय देशमुख भाजपा के फणनवीस सरकार के कार्यकाल को छोड़ दें तो 1995 से लगातार मंत्री हैं। देशमुख 1995 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में कटोल विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे। इसके बाद से वह 1999, 2004, 2009 व 2019 में जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2014 में अनिल देशमुख को हार का सामना करना पड़ा था।
 

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