चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस आर भारद्वाज की बेंच ने कहा कि कोर्ट के इस बिंदु पर किसी भी हस्तक्षेप से पंचायत चुनाव स्थगित हो सकते हैं।

West Bengal Panchayat election: कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की पंचायत चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि 2023 में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए सीट आरक्षण मानकों के संबंध में पीआईएल दायर करने वाले शुभेदु अधिकारी की दलील में मेरिट है। चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस आर भारद्वाज की बेंच ने कहा कि कोर्ट के इस बिंदु पर किसी भी हस्तक्षेप से पंचायत चुनाव स्थगित हो सकते हैं।

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क्या कहा हाईकोर्ट ने?

मंगलवार को प्रधान न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की खंड अदालत ने अधिकारी की जनहित याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने कहा कि वह चुनाव के मुद्दों में शामिल नहीं होगा। राज्य चुनाव आयोग इससे संबंधित सभी निर्णय करेगा। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने कहा कि अधिकारी यदि चाहें तो केंद्रीय बलों के संबंध में एक अलग मामला प्रस्तुत कर सकते हैं। हालाँकि, उच्च न्यायालय इस समय कोई बाधा नहीं डालेगा। अदालत ने कहा कि विभिन्न श्रेणियों में सीटों के आरक्षण के लिए किसी प्रकार का हस्तक्षेप नही किया जा सकता है। जनहित याचिका दायर करने वाले विधायक इसे चुनाव आयोग मे शिकायत कर सकते हैं। पंचायत चुनाव में कोई भी हस्तक्षेप इससे स्थगित कर सकता है।

आरक्षण और केंद्रीय बलों से संबंधि जनहित याचिका की थी दायर

अधिकारी ने ओबीसी समूह की गणना के संबंध में दो प्रमुख आधारों पर पंचायत चुनाव से पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया था। उन्होंने आरक्षण को लेकर सवाल उठाने के साथ मतदान के दिन सेंट्रल फोर्सेस की तैनाती की बात भी उठाई थी। उन्होंने बताया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) 2011 में सूचीबद्ध नहीं थे, अनुसूचित जाति और जनजाति थे। लेकिन चुनाव आयोग ओबीसी की गणना घर-घर जाकर करा रहा है। अधिकारी ने आयोग के इस कदम की आलोचना करते हुए कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की है।

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