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बस में पुलिस ने लगाई आग से राइफल से फायरिंग तक ऐसी 4 अफवाहों का दिल्ली पुलिस ने बताया सच

दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में रविवार को छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प पर दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। दिल्ली पुलिस की पीआरओ एसएस रंधावा ने कहा कि रविवार को 2 बजे विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे, इसमें स्थानीय लोग भी शामिल थे। हमने बहुत कम बल का प्रयोग किया। 

Delhi Police over yesterday incident at Jamia Millia Islamia news and update KPP
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New Delhi, First Published Dec 16, 2019, 3:18 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में रविवार को छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प पर दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। दिल्ली पुलिस के पीआरओ एसएस रंधावा ने कहा कि रविवार को 2 बजे विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे, इसमें स्थानीय लोग भी शामिल थे। हमने बहुत कम बल का प्रयोग किया। 

जामिया में हिंसा और उपद्रव पर कुलपति नजमा अख्तर ने कहा, यूनिवर्सिटी में बिना इजाजत पुलिस की एंट्री बर्दास्त नहीं। बच्चों पर मानसिक असर पड़ा है। उसका जिम्मेदार कौन है। पुलिस ने लाइब्रेरी में लाठीचार्ज किया। यूनिवर्सिटी में घुसने पर एफआईआर कराएंगे। सबूतों को सामने रखेंगे।

दिल्ली पुलिस की मुख्य बातें

- रंधावा ने कहा, प्रदर्शनकारी लगातार पुलिस को भड़का रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने चार बसों आग लगाई। कुल 100 बाहनों को नुकसान पहुंचाया गया।
- '30 पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं। इसमें अफसर रैंक के लोग भी हैं। हमारा एक साथी आईसीयू में है।'
- 'मामले की जांच दिल्ली की क्राइम ब्रांच करेगी।'
- 'छात्र चिंतित ना हों, कार्रवाई उन्हीं के खिलाफ होगी, जो इसमें शामिल थे।'

इन अफवाहों का पुलिस ने किया खंडन

1- पुलिस ने बसों में आग लगाई? 
रंधावा ने कहा, सोशल मीडिया पर अफवाहें चल रही हैं। किसी अफवाह पर ध्यान ना दें। ना किसी बहकावे में आएं। एक वीडियो चल रहा है, इसमें कहा जा रहा है पुलिस कर्मी ने बस में आग लगाई। जबकि हम उस बस का नंबर दे रहे हैं, जो अभी भी खड़ी है। उस बस में चिंगारी लगी थी, जिसे पुलिसकर्मी पानी से बुझा रहा था।

"शांतिपूर्ण हो विरोध प्रदर्शन" : डीसीपी साउथ ईस्ट दिल्ली चिन्मय बिस्वाल ने कहा, "मैं जामिया के छात्रों से अपील करता हूं, कि जब असामाजिक तत्व उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल हों तो विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित होगी। विरोध शांतिपूर्ण और अनुशासित होना चाहिए।"

2- किसी की जान नहीं गई
पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर अफवाह चल रही है कि कई लोगों की जान चली गई। लेकिन यह सिर्फ अफवाह है। किसी की जान नहीं गई है। इससे पहले जामिया प्रशासन ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि किसी की जान नहीं गई। 

3- फायरिंग नहीं हुई
रंधावा ने बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो चल रहे हैं कि पुलिस ने भारी फायरिंग की। जबकि कल की घटना में पुलिस की ओर से कोई फायरिंग नहीं हुई। हमने बहुत कम बल का इस्तेमाल किया। 

जामिया हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? : जामिया हिंसा का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जीफ जस्टिस बोबड़े ने कहा कि हम किसी को भी आरोपी नहीं बता रहे हैं। लेकिन हिंसा रुकनी चाहिए। छात्र होने के नाते हिंसा का अधिकार नहीं मिल जाता है। अगर हिंसा नहीं रुकी तो मामले की सुनवाई नहीं करेंगे।

4- पुलिस बिना इजाजत के जामिया में घुसी
रंधावा के मुताबिक, जब पुलिस प्रदर्शनकारियों को हटा रही थी। तो कुछ प्रदर्शनकारी जामिया यूनिवर्सिटी में भी घुस गए। वहां से पथराव किया गया। उन्हीं को हटाने के लिए कुछ पुलिसकर्मी भी यूनिवर्सिटी में गए थे।

बच्चों को डराने की कोशिश : वीसी ने कहा कि बहुत अफवाहें उड़ रही हैं, जिसमें से एक है कि एक बच्चे की मौत हुई है। लेकिन ऐसा नहीं है। किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है। बाहर कुछ हुआ तो जामिया का नाम लिया गया। कैंपस सिक्योर होना चाहिए। जामिया को टारगेट न किया जाए।

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