हरियाणा में 303 दिन और 15 दिन के आमरण अनशन के बाद, किसानों ने 14 दिसंबर को दिल्ली कूच का ऐलान किया है। सरकार से बातचीत विफल होने के बाद किसानों ने ये कदम उठाया है।

Farmers Delhi March: किसानों के दिल्ली कूच की तारीख तय हो गई है। मंगलवार को किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने ऐलान किया कि किसान 14 दिसंबर को दिल्ली की ओर कूच करेंगे। हरियाणा में किसान अपनी मांगों को लेकर 303 दिन से आंदोलित हैं। जबकि पिछले 15 दिनों से किसानों का आमरण अनशन भी चल रहा है। किसान नेता ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों को सुनने तक के लिए सरकार का कोई प्रतिनिधि उनसे संपर्क नहीं किया है। जबकि किसान हमेशा बातचीत को तैयार रहा है। उन्होंने कहा कि अब दिल्ली कूच के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

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दरअसल, दिल्ली से सटे शंभू बॉर्डर पर किसान फरवरी से ही प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान बीते 13 फरवरी से शंभू बार्डर और खनौरी बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं। किसानों का शांतिपूर्ण ढंग से किया जा रहा आंदोलन अब दिल्ली मार्च में बदलने जा रहा है। बीते दिनों भी किसानों ने अपना एक जत्था दिल्ली भेजा था लेकिन भारी संख्या में पुलिस और सुरक्षाबलों की तैनाती व जगह-जगह बैरिकेड्स, कंटीले तारों से उनको रोकने की कोशिश हुई। किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। कई किसानों के घायल होने के बाद किसान संगठन ने जत्था को वापस बुला लिया था। अब एक बार फिर दिल्ली कूच की नई तारीखों का ऐलान किया गया है।

पंढेर ने किया फिल्म जगत, नेताओं और धर्मगुरुओं से समर्थन की अपील

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने किसानों की मांगों का समर्थन करने के लिए फिल्म स्टार्स, सिंगर्स, धार्मिक नेताओं से अपील की है। उन्होंने कहा कि दिग्गज हस्तियां किसानों की मांगों को लेकर साथ आएं। साथ ही हिरासत में लिए गए किसानों की रिहाई की भी अपील की है।

6 और 8 दिसंबर को किया था दिल्ली कूच

संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा के बैनर तले 101 किसानों का जत्था बीते 6 व 8 दिसंबर को दो बार दिल्ली कूच की कोशिश किया था। हालांकि, हरियाणा और दिल्ली की फोर्स ने किसानों को आगे नहीं बढ़ने दिया। किसानों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़प में कई किसान घायल हो गए थे।

क्या है किसानों की मांग?

किसान, एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, किसानों और खेत मजदूरों के लिए पेंशन, बिजली दरों को महंगा न किए जाने, किसानों पर लादे गए पुलिस केस वापस किए जाने, लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों को न्याय सहित कई अन्य मांगों को लेकर आंदोलित हैं। किसान आंदोलन में मरे किसानों के परिवारों को मुआवजा की भी मांग यह किसान कर रहे हैं।

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