देश के जाने-माने कानूनविद पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी का 91 साल की उम्र में शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वे कोविड संक्रमण और बुढ़ापे से जुड़ीं दूसरी अन्य बीमारियों से जूझ रहे थे। देश के शीर्ष और सम्मानित संविधान विशेषज्ञों में शुमार सोराबजी दो बार भारत के एटॉर्नी जनरल रहे। 2002 में उन्हें देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण दिया गया था।

नई दिल्ली. देश के जाने-माने कानूनविद पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी का 91 साल की उम्र में शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वे कोविड संक्रमण और बुढ़ापे से जुड़ीं दूसरी अन्य बीमारियों से जूझ रहे थे। देश के शीर्ष और सम्मानित संविधान विशेषज्ञों में शुमार सोराबजी दो बार भारत के एटॉर्नी जनरल रहे। 2002 में उन्हें देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण दिया गया था। सोराबजी ने भारतीय संविधान की रक्षा के लिए कई केस फ्री में लड़े। 1984 के सिख विरोधी दंगे के पीड़ितों को न्याय दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके निधन पर राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के जजों और वरिष्ठ वकीलों ने शोक संवेदना व्यक्त की है।

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सोराबजी से जुड़ीं खास बातें...

  • सोराबजी का जन्म 1930 में मुंबई के पारसी परिवार में हुआ था। उन्होंने 1953 में वकालत शुरू की थी। 1971 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिया था। इमरजेंसी के बाद बनी जनता सरकार में वे 1977 से 1980 तक देश के सॉलिसीटर जनरल रहे।
  • इसके बाद 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री कार्यकाल में उन्हें भारत का एटॉर्नी जनरल बनाया गया था। अटल बिहारी वाजपेयी ने भी अपने प्रधानमंत्री काल में 1998 से 2004 उन्हें एटॉर्नी जनरल बनाए रखा।
  • 70 के दशक अगले 40 साल तक उन्होंने कई बड़े केस लड़े। इनमें 1973 का केशवानंद भारती केस शामिल था। इसमें सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा था कि संविधान के मौलिक ढांचे को प्रभावित करने वाला कोई भी कानून संसद नहीं बना सकती है। सोराबजी ने 1976 में मेनका गांधी का केस लड़ा। यह सम्मान से जीने को जीवन के अधिकार से जुड़ा था।