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HC ने दिल्ली सरकार से कहा-दवा और मेडिकल उपकरण महंगे रेट पर बेचने वालों पर एक्शन लो

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझते भारत में अस्पतालों की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। इन्हें फिर से पटरी पर लाने कोर्ट को भी आगे आना पड़ा है। दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को फिर सुनवाई की। दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट राहुल मेहरा ने हाईकोर्ट से कहा कि केंद्र सरकार दिल्ली को आवंटित कोटे की 100 मीट्रिक टन ऑक्सीजन क्यों नहीं दे सकती? हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को दवा और मेडिकल उपकरण एमआरपी से अधिक दाम पर बेचने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

Hearing in Delhi High Court on the subject of medical oxygen in corona crisis kpa
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New Delhi, First Published May 2, 2021, 6:37 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझते भारत में अस्पतालों की व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। इन्हें फिर से पटरी पर लाने कोर्ट को भी आगे आना पड़ा है। दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को फिर सुनवाई की। दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट राहुल मेहरा ने हाईकोर्ट से कहा कि केंद्र सरकार से दिल्ली को आवंटित कोटे की आक्सीजन भी नहीं मिल रही है, जो 100 मीट्रिक टन है। वकील ने कहा कि अन्य राज्यों के विपरीत दिल्ली को उसके कोटे की ऑक्सीजन नहीं मिल रही है।

दिल्ली के तीन बड़े अस्पतालों ने ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा हाईकोर्ट में उठाया। सीताराम भारतीय अस्पताल, वेंकेटेश्वर अस्पताल और इंस्टीट्यूट ऑफ ब्रेन एंड स्पाइन, लाजपत नगर की बात सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली को मिलने वाली ऑक्सीजन और केंद्र के आंकड़ों में विसंगतियां हैं। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को दवा और मेडिकल उपकरण एमआरपी से अधिक दाम पर बेचने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सारी जिम्मेदारी केंद्र पर नहीं डाली जानी चाहिए। कई गैर औद्योगिक राज्य खुद ऑक्सीजन टैंकर की व्यवस्था कर रहे हैं। दिल्ली सरकार को भी ऐसा ही सोचना चाहिए।

मध्य प्रदेश सरकार को फटकार
इधर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन की उपलब्धता करवाने के प्रयासों की दलील पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार को फटकार लगाई है। साथ ही केंद्र सरकार से कहा कि वह राज्य के लिए 100 मीट्रिक टन तक ऑक्सीजन आपूर्ति बढ़ाए। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रफीक एवं जस्टिस अतुल श्रीधरन की युगलपीठ ने शुक्रवार को यह निर्णय लिया था, जिसे हाईकोर्ट की वेबवाइट पर शनिवार को पब्लिश किया गया। हाईकोर्ट ने कहा, मीडिया में आईं खबरों के अनुसार दो हफ्तों में ऑक्सीजन की कमी से कई लोगों ने जान गंवा दी। राज्य सरकार के लिए ऑक्सीजन और रेमडिसविर इंजेक्शन ये दो बड़ी समस्याएं हैं। बता दें कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट द्वारा 19 अप्रैल को जारी विभिन्न निर्देशों के संबंध में एक कार्रवाई रिपोर्ट दायर की थी। यह भी जान लें शनिवार को गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दावा किया था कि मध्य प्रदेश में अब ऑक्सीजन की कोई दिक्कत नहीं है।

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