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पाकिस्तान में हो सकता है तख्तापलट, बाजवा ने 111वीं ब्रिगेड की छुट्टियां रद्द की

यूएन में फेल होने के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की अपने ही देश में काफी आलोचना हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार का तख्तापलट भी हो सकता है। खबर है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल बाजवा के आदेश पर 111 ब्रिगेड की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।  

Imran government Planning of coup in Pakistan, 111th Brigade holidays canceled
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Islamabad, First Published Oct 4, 2019, 3:35 PM IST
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इस्लामाबाद. यूएन में फेल होने के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की अपने ही देश में काफी आलोचना हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार का तख्तापलट भी हो सकता है। खबर है कि पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल बाजवा के आदेश पर 111 ब्रिगेड की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। जानकार मानते हैं कि 111 ब्रिगेड का इस्तेमाल हमेशा तख्तापलट में किया जाता रहा है। वहीं सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा ने कारोबारियों के साथ बैठक भी की। बाजवा की कारोबारियों के साथ ये तीसरी मीटिंग थी। तीनों बैठकें कराची, रावलपिंडी के सैन्य मुख्यालयों में हुई हैं।

क्या है 111वीं ब्रिगेड ?
पाकिस्तान में इस ब्रिगेड को ट्रिपल 1 ब्रिगेड और 111वीं ब्रिगेड जैसे नामों से जाना जाता है। 1956 में बनाई गई इस ब्रिगेड का मुख्य काम तुरन्त एक्शन लेना है। रावलपिंडी में इसका हेडक्वार्टर है। इस ब्रिगेड का मुख्य काम वीवीआईपी और देश के मुख्य मेहमानों को सुरक्षा प्रदान करना है। इसके अलावा यह राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भी लगी रहती है। 

पहली बार कब दिखी ब्रिगेड की इनवॉल्मेंट
इस ब्रिगेड की पहली इनवॉल्मेंट तब हुई, जब सरकार में शामिल होने के लिए जनरल अयूब खान ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) इस्कंदर मिर्जा की सरकार को बर्खास्त कर दिया। 4 जुलाई 1977 को जनरल जिया-उल-हक ने तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार का तख्तापलट किया था। तब बिगड़ती स्थितियों को संभालने के लिए 111 ब्रिगेड की महत्वपूर्ण भूमिका थी। 

ऑपरेशन साइलेंस में भी थी भागीदारी
ब्रिगेड की अंतिम भागीदारी ऑपरेशन साइलेंस में थी, जिसमें सरकार के प्रमुखों ने सेना, पुलिस, पाकिस्तान आर्मी रेंजर्स और 111 वीं ब्रिगेड को लाल मस्जिद परिसर को घेरने का आदेश दिया था। तब अजीज और गाजी के अनुयायियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं और इस्लामवादियों ने सुरक्षा कर्मियों पर गोलियां चला दीं। तब 111 वीं ब्रिगेड ने ही मोर्चा संभाला था। 2010 में 111 वीं ब्रिगेड ने इस्लामाबाद को अपने नियंत्रण में ले लिया था और चीनी प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री दोनों को कड़ी सुरक्षा प्रदान की थी।
 

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