सीमापार से ड्रग्स सिंडिकेट एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। ड्रग्स के अवैध धंधे से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा सीमापार से टेररिस्ट ग्रुप्स को मुहैया कराया जाता है। हथियार और ड्रग्स नेक्सस का जम्मू-कश्मीर में आए दिन भंड़ाफोड़ होता रहता है।

Jammu-Kashmir Drugs syndicate: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए जुटाए जा रहे फंड्स में ड्रग के कारोबार का सबसे बड़ा हाथ है। केंद्र शासित राज्य में ड्रग्स-टेररिज्म का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। ड्रग्स-टेररिज्म में संलिप्तता पर पांच पुलिसकर्मियों और एक शिक्षक को बर्खास्त किया गया है। दरअसल, पूरे राज्य में टेरर नेटवर्क और सेपरिस्ट इकोसिस्टम को तोड़ने के लिए पुलिस कई स्तर पर कार्रवाईयां कर रही है।

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बर्खास्त किए गए अधिकतर पुलिसकर्मी बॉर्डर एरिया पर थे तैनात

ड्रग्स नेटवर्क की संलिप्तता में जिन पुलिसकर्मियों को बर्खास्त किया गया है उनमें अधिकतर बॉर्डर एरिया क्षेत्र के हैं। बर्खास्त पुलिसकर्मियों की पहचान फारूक अहमद शेख, खालिद हुसैन शाह, रहमत शाह, इरफान अहमद चालकू और सैफुलदीन के रूप में हुई है। पुलिसवालों के अलावा स्कूल टीचर नाजामउद्दीन भी ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़े होने पर बर्खास्त किए गए है।

ड्रग्स सिंडिकेट करता है टेररिस्ट ग्रुप्स को फंडिंग

केंद्र शासित प्रदेश में हाल के दिनों में आतंकवादी हमलों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। आतंकवाद के फलने-फूलने में सिंडिकेट ड्रग्स के कारोबार का सहारा ले रहे हैं। सीमापार से ड्रग्स सिंडिकेट एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। ड्रग्स के अवैध धंधे से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा सीमापार से टेररिस्ट ग्रुप्स को मुहैया कराया जाता है। हथियार और ड्रग्स नेक्सस का जम्मू-कश्मीर में आए दिन भंड़ाफोड़ होता रहता है। हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थ तस्करी के लिए कई पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को गिरफ्तार किया गया है।

2021 में बीएसएफ अधिकारी से 91 लाख हुआ था बरामद

बॉर्डर उस पार से ड्रग्स और टेररिस्ट नेटवर्क में सुरक्षा बलों की संलिप्तता का पहला मामला 2021 में पहली बार सामने आया था। एनआईए ने इसका खुलासा करते हुए कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा इलाका में तैनात एक बीएसएफ अधिकारी को अरेस्ट किया था। अधिकारी पर लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादी ग्रुप से जुड़े सीमा पार से मादक पदार्थ सिंडिकेट चलाने का आरोप था। एनआईए ने जम्मू के सांबा से बीएसएफ के सब-इंस्पेक्टर रोमेश कुमार से 91 लाख रुपये कैश रिकवर किया था। जांच एजेंसी ने दावा किया जो कैश बरामद हुआ वह ड्रग्स तस्करी में उसका हिस्सा था।

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