प्रधानमंत्री मोदी ने निखिल कामथ के पॉडकास्ट में अपने बचपन और राजनीति के सफ़र पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे एक डॉक्टर के चुनाव लड़ने की घटना ने उन्हें प्रभावित किया और राजनीति में अच्छे लोगों की जगह बनाने के बारे में सोचने पर मजबूर किया।

PM Modi Podcast: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ निखिल कामथ ने अपने पॉडकास्ट में तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों पर सवाल पूछे, उनसे उनकी बचपन से लेकर राजनीतिक यात्रा तक पर बातचीत की। पॉलिटिक्स में पैसा और राजनेताओं पर भ्रष्टाचार के लग रहे आरोपों के बीच राजनीति में अच्छे लोगों की जगह कैसे बने? इस सवाल का जवाब पीएम नरेंद्र मोदी ने बचपन की कहानी को साझा करते हुए दिया।

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पीएम मोदी ने कहा कि मुझे बचपन की एक घटना याद है। मेरे गांव में एक डॉक्टर बसंत भाई पारीख थे। आंखों के अच्छे डॉक्टर थे। सेवा करते थे, बहुत अच्छे वक्ता थे। हिंदी और गुजराती आती थी। वह एक बार निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। हम सब बानर सेना झंडा लेकर पीछे-पीछे घूमते थे। मुझे मोटा-मोटा याद है। वह लोगों से एक-एक रुपया लिए थे चुनाव में। फिर एक सार्वजनिक सभा में उन्होंने हिसाब दिया था, उन पैसों का। कोई दो-ढ़ाई सौ रुपये मिले थे। बहुत कम खर्च हुआ था। हालांकि, कम वोटों से जीते थे लेकिन जीत गए। ऐसा नहीं है कि समाज, सत्य को नहीं जानता। आत्मधैर्य चाहिए, आत्मसमर्पण चाहिए। एक कांट्रैक्ट का भाव नहीं होना चाहिए कि मैं इतना करता हूं तो मुझे वोट मिलने चाहिए। फिर आप सफल नहीं होते। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति को चुनाव, एमएलए, एमपी में बांट कर रख दिया गया है। हम समाजिक जीवन से जुड़े किसी भी काम में लग जाए तो वह राजनीतिक प्रभाव पैदा करता ही करता है। कोई एक छोटा सा आश्रम भी चलाता है, बच्चियों की शिक्षा का काम करता है, स्वयं चुनाव नहीं लड़ता है लेकिन उसके प्रयासों का परिणाम होता है कि राजनीति का परिणाम बदलता है। राजनीति को अलग दृष्टि से देखना चाहिए। राजनीति में वोटर स्वयं भी एक पॉलिटिशयन है। वह अपना वोट देता है तो एक भाव होता है कि किसे दूं और किसको न दूं। जिसको नहीं देता, उसके प्रति उसके मन में कोई भाव होता है।

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