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डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष का पद तो गया, बगावत में पायलट ने और क्या-क्या खोया?

राजस्थान में कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाने वाले सचिन पायलट को डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। उन्होंने साफ कह दिया था कि सीएम अशोक गहलोत के साथ काम नहीं करेंगे। ऐसे में कांग्रेस ने कार्रवाई की। दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत झोंकने और पार्टी को जीत दिलाने वाले सचिन पायलट को पार्टी के बगावत करने के बदले क्या-क्या खोना पड़ा?

Sachin Pilot removed as Deputy CM and State President in Rajasthan kpn
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Jaipur, First Published Jul 14, 2020, 5:28 PM IST
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नई दिल्ली. राजस्थान में कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाने वाले सचिन पायलट को डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया है। उन्होंने साफ कह दिया था कि सीएम अशोक गहलोत के साथ काम नहीं करेंगे। ऐसे में कांग्रेस ने कार्रवाई की। दिसंबर 2018 के विधानसभा चुनाव में पूरी ताकत झोंकने और पार्टी को जीत दिलाने वाले सचिन पायलट को पार्टी के बगावत करने के बदले क्या-क्या खोना पड़ा?

गांधी परिवार से दूरी
सचिन पायलट को गांधी परिवार के बेहद करीब माना जाता था। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी, तीनों से ही सचिन पायलट को अच्छे संबंध थे। लेकिन अब बगावत के बाद इनसे रिश्ते खराब हो जाएंगे। 

छोटी सी उम्र में मिली बड़ी कामयाबी
कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पायलट को पद से हटाते वक्त कहा, सचिन पायलट को 26 साल की उम्र में सांसद, 32 साल की उम्र में केंद्रीय मंत्री, 34 साल की उम्र में प्रदेश अध्यक्ष और 40 साल की उम्र में डिप्टी सीएम का पद मिला। सोनिया और राहुल के विशेष आशीर्वाद से उनपर इतनी कृपा संभव हुई। ऐसे में कांग्रेस की सरकार गिराने की साजिश में सामिल होना बहुत ही दुख की बात है। 

कुछ विधायकों और मंत्रियों का भी समर्थन खो दिया
सचिन पायलट ने अपनी बगावत से कुछ विधायकों और मंत्रियों का भी समर्थन खो दिया। पायलट खेमे के दानिश अबरार और रामनारायण मीणा सहित 6 विधायक गहलोत की बैठक में शामिल हुए। इसके अलावा 22 विधायक सचिन के साथ हैं, लेकिन वे  भाजपा में शामिल हुए तो करीब 10 विधायक सचिन पायलट का साथ छोड़ सकते हैं।

फ्लोर टेस्ट पर गहलोत का जवाब
राजस्थान में भाजपा फ्लोर टेस्ट की मांग कर रही है। इसपर  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि भगवान ने भी इत्ती अक्ल तो दी होगी कि फ्लोर टेस्ट की मांग कब और कैसे उठाई जानी है।

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