नई दिल्ली. लॉकडाउन के दौरान शराब की बिक्री पर दिशानिर्देश तय करने को लेकर याचिका लगाना भारी पड़ गया। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना लगा दिया। कोर्ट का कहना था कि इन याचिकाओं से समय बर्बाद होता है। ऐसी याचिकाएं सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट हैं। दोनों याचिकाओं में बिना वकील के खुद याचिकाकर्ता ने सीधे पेश हुए थे। 

पहली याचिका में शराब की दुकान बंद कराने की मांग 
याचिका में दलील दी गई थी कि शराब की दुकानों के सामने भीड़ जुटती है। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है। इसलिए दुकानों को बंद कर दिया जाए। 

दूसरी याचिका में शराब बिक्री पर दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
एक याचिका में कहा गया था कि हम शराब की दुकान को बंद करने की मांग नहीं करते हैं, बल्कि दुकानें खुली रहें, लेकिन बिक्री के लिए कोर्ट दिशा-निर्देश जारी करे।  

कोर्ट ने कहा, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा तो प्रशासन से कहें
कोर्ट ने कहा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। दुकानदार बाहर खड़ा होकर यह नहीं देख सकता है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है या नहीं। यह काम प्रशासन का है। इसकी शिकायत प्रशासन से की जा सकती है। 

तमिलनाडु में खुलेंगी शराब की दुकानें
तमिलनाडु में अब शराब की दुकानें खुलेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने शराब की दुकानें बंद रखने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दिया है। हाईकोर्ट ने केवल शराब की बिक्री ऑनलाइन करने का आदेश दिया था। तमिलनाडु सरकार हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। राज्य सरकार का कहना था कि ऑनलाइन तरीके से शराब लेना सबके लिए संभव नहीं है। ऐसे लोग दूसरे राज्य से शराब खरीदेंगे। इससे कोरोना फैलने का अंदेशा रहेगा। 4 हफ्ते बाद होगी सुनवाई।