आज हम उन महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित करने की कोशिश करेंगे, जिससे ये समझने में आसानी हो की उत्तराखंड में UCC के लागू होने से किस तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे।

यूसीसी। उत्तराखंड विधानसभा में आज (6 फरवरी) को समान नागरिक संहिता (UCC) पर कानून पेश हो चुका है। इस फैसले पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को कहा कि प्रस्तावित UCC न केवल सभी वर्गों की भलाई के लिए होगा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास' के दृष्टिकोण के अनुरूप भी होगा।

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सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में सरकार द्वारा नियुक्त पैनल ने कई सिफारिशों वाली चार-खंड, 749 पेज की रिपोर्ट का ड्राफ्ट तैयार किया है। पैनल ने 2.33 लाख लिखित फीडबैक ऑनलाइन एकत्र किए और 70 से अधिक सार्वजनिक मंचों का आयोजन किया। इन बैठकों के दौरान, पैनल के सदस्यों ने मसौदा तैयार करने में मदद के लिए लगभग 60,000 लोगों से बातचीत की। आइए आज हम उन महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित करने की कोशिश करेंगे, जिससे ये समझने में आसानी हो की UCC के लागू होने से किस तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे। इसका आम लोगों के जीवन पर क्या असर पड़ेगा।

उत्तराखंड में UCC होने पर क्या होगा?

  • किसी भी महिला के दोबारा शादी करने पर किसी तरह की शर्त लागू नहीं होगी।
  • लिव इन रिलेशनशिप में रहने से पहले डिक्लेयर करना जरूरी हो जाएगा।
  • लिव इन रिलेशनशिप डिक्लेयर न करने पर 6 महीने की सजा का प्रावधान।
  • UCC के दायरे से अनुसूचित जनजाति बाहर।
  • पति या पत्नी के जीवित रहते दूसरी शादी पर रोक।
  • लड़कियों को मिलेगा बराबर का हक।
  • पुरुष-महिला को तलाक देने के एक अधिकार मिलेगा।
  • हर धर्म की लड़कियों की शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल।
  • मुसलमानों को 4 शादी करने की छूट नहीं रहेगी।
  • हर धर्म के लोगों के लिए एक तरह का कानून।
  • हर धर्म के लोगों के लिए शादी या तलाक का एक कानून।

UCC के लागू होने के बाद भी नहीं बदलेगी कुछ चीजें

  • धार्मिक मान्यताओं पर किसी तरह का फर्क नहीं होगा।
  • खान-पान, पूजा-पाठ, रहन-सहन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
  • धार्मिक रीति-रिवाज पर नहीं पड़ेगा किसी भी तरह का असर।

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