यह कहानी एक ऐसी महिला की है, जो खुद पंचायत में एक मामूली नौकरी करती है। लेकिन पेंशन के लिए परेशान बुजुर्गों की मदद के लिए बाइक में रोज अपना पेट्रोल फूंक रही है।
लोगों के काम आ सकूं, तो खुशी होगी
मुन्नी की आर्थिक हालत अच्छी नहीं है। फिर भी वे लोगों की मदद के लिए अपनी गाड़ी में खुद पेट्रोल डलवाती हैं। मुन्नी के पिता गाड़ियों के पंचर बनाने का काम करते थे। बावजूद उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाया। उसे ग्रेजुएशन कराया। मुन्नी पंचायत में साथिन के रूप में अल्प मानदेय पर काम कर रही हैं। उन्हें महज 3500 रुपए मानदेय मिलता है। मुन्नी ने 8 महीने पहले ही बाइक चलाना सीखा है। मुन्नी ने बताया कि वे सुबह जल्दी उठकर घर का सारा कामकाज निपटाती हैं। फिर मरुधरा ग्रामीण बैंक में सोशल डिस्टेंसिंग की जिम्मेदारी संभालती हैं। मुन्नी ने कहा कि वो किसी के काम आ सकें, तो इससे बड़ी खुशी की बात और कुछ नहीं होगी।
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