जयपुर में फिर एक मासूम को स्ट्रीट डॉग ने बनाया निवाला, शरीर पर कई जगह पर दांत गड़ा दिए बच्चे के कान पर ही लटक गया डॉग। डॉक्टर ने कहा प्लास्टिक सर्जरी  ही अंतिम उपाय 

जयपुर. राजधानी जयपुर में स्ट्रीट डॉग ने बच्चों की जान जोखिम में डाल रखी है। पिछले सप्ताह ही 9 साल के एक बच्चे को 40 जगहों से पांच डॉग्स ने काट खाया था। बच्चे को कई दिन तक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि जयपुर में ही एक बार फिर से वहीं घटना सामने आई जहां 8 साल के एक मासूम बच्चे को स्ट्रीट डॉग ने अपना निवाला बना लिया। डॉग ने बच्चे के शरीर पर कई जगह दांत गड़ा दिए। उसके चेहरे पर पंजा मार दिया और उसके कान पर लटक गया । लोगों ने बड़ी मुश्किल से बच्चे को छुड़ाया और डॉग को वहां से भगाया। 

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खाने का आयटम देख किया हमला

दरअसल जयपुर के झालाना डूंगरी क्षेत्र में रहने वाला कुणाल साहू शाम के समय घर के नजदीक ही किराना की दुकान पर बिस्किट लेने गया था। बिस्किट लेकर जब वह घर लौट रहा था, इस दौरान डॉग ने उस पर हमला किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि डॉग ने उसके हाथ में खाने की चीज देखी और उसका पीछा किया। लेकिन जब बच्चे ने दौड़ लगाई तो डॉग भी उसके पीछे भागने लगा और अंत में उस पर हमला कर ही दिया। 

बच्चे पर हुआ गहरा साइकोलॉजिकल इफेक्ट
तीसरी क्लास में पढ़ने वाले 8 साल के कुणाल की लहुलुहान वाली हालत घरवालों ने देखी तो बवाल मच गया। परिजन उसे लेकर नजदीकी अस्पताल में गए तो उसकी कंडीशन देख वहां के डॉक्टरों ने उसे एक बड़े निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहां इलाज कराया तो चिकित्सकों ने कहा कि कान की स्थिति ऐसी नहीं है कि इस पर टांके लगाए जाए। बच्चे की प्लास्टिक सर्जरी ही एकमात्र उपाय हैं। फिलहाल डॉक्टरों ने बच्चे की ड्रेसिंग की है। उसे इंजेक्शन दिए हैं और उसके बाद 8 तारीख को बच्चे की प्लास्टिक सर्जरी करने की तैयारी की है। 
इस बीच बच्चे के दिमाग पर गहरा सदमा बैठा है। वह अपनी मां के आंचल से नीचे भी नहीं उतर रहा है।उसकी हालत बेहद खराब है। 


गौरतलब है कि जयपुर शहर में स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी को लेकर काफी समय से चर्चा चल रही है। लेकिन नगर निगम के अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यही कारण है कि लगभग हर दिन शहर में स्ट्रीट डॉग्स किसी पर हमला कर रहे हैं। जयपुर शहर में ही करीब 15 हजार से ज्यादा पेट डॉग और करीब 40000 से भी ज्यादा स्ट्रीट डॉग है। अगर पूरे प्रदेश की संख्या निकाली जाए तो यह संख्या 10 लाख से भी ज्यादा जा सकती है। इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद भी न तो सरकार और न ही जिलों का लोकल प्रशासन इस बारे में गंभीरता से विचार कर रहा है।