भारत रत्न रतन टाटा के निधन से पूरा देश शोक में डूबा है. बहुत कम लोग जानते हैं कि 1983 में भारत की पहली विश्वकप जीत के पीछे भी उनका ही हाथ था.

नई दिल्ली. भारत के दिग्गज उद्योगपति, टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष रतन टाटा (86) का बुधवार देर रात उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया. रतन टाटा के निधन से पूरा भारत शोक में डूब गया है. भारतीय क्रिकेट जगत ने भी दिग्गज उद्योगपति के निधन पर शोक व्यक्त किया है. दूरदर्शी नेता रतन टाटा कई लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत थे. इसमें खिलाड़ी भी पीछे नहीं हैं. 

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रतन टाटा टीम इंडिया की पहली एकदिवसीय विश्वकप जीत के पीछे भी थे, यह बात बहुत कम लोग जानते हैं. 1983 के एकदिवसीय विश्वकप टूर्नामेंट में कपिल देव की अगुवाई में टीम इंडिया ने शक्तिशाली वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार चैंपियन बनी थी. इसके पीछे रतन टाटा का दूरदर्शी रुख था. 

1983 के एकदिवसीय विश्वकप की जीत के नायक माने जाने वाले मोहिंदर अमरनाथ, संदीप पाटिल और रवि शास्त्री, इन तीनों क्रिकेटरों के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने के पीछे टाटा का उद्यम था. यह भले ही आश्चर्यजनक लगे लेकिन यह सच है. इन तीनों क्रिकेटरों ने टाटा समूह की टीम का प्रतिनिधित्व किया और जो क्रिकेट के गुर सीखे, वही विश्वकप जीतने में काम आए. मोहिंदर अमरनाथ ने घरेलू क्रिकेट में एयर इंडिया टीम का प्रतिनिधित्व किया, संदीप पाटिल ने टाटा ऑयल मिल्स टीम का प्रतिनिधित्व किया. रवि शास्त्री ने टाटा स्टील टीम का प्रतिनिधित्व किया था. 

यही नहीं, फारुख इंजीनियर (टाटा मोटर्स), मोहिंदर अमरनाथ (एयर इंडिया), जवागल श्रीनाथ (इंडियन एयरलाइंस), संजय मांजरेकर (एयर इंडिया), किरण मोरे (टीएससी), संदीप पाटिल (टाटा ऑयल मिल्स), वीवीएस लक्ष्मण (इंडियन एयरलाइंस), युवराज सिंह (इंडियन एयरलाइंस), हरभजन सिंह (इंडियन एयरलाइंस), सुरेश रैना (एयर इंडिया), रॉबिन उथप्पा (एयर इंडिया), मोहम्मद कैफ (इंडियन एयरलाइंस), निखिल चोपड़ा (इंडियन एयरलाइंस), इरफान पठान (एयर इंडिया), आरपी सिंह (एयर इंडिया), दिनेश मोंगिया (इंडियन एयरलाइंस), अजीत अगरकर (टाटा स्टील), रोहन गावस्कर, रमेश पोवार, शारदुल ठाकुर (टाटा पावर), जयंत यादव (एयर इंडिया) और जहीर खान (एयर इंडिया) जैसे भारतीय क्रिकेटरों के विकास में टाटा समूह की भूमिका रही है.