ऋषभ पंत अब दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा नहीं रहेंगे। कोचिंग स्टाफ नियुक्ति को लेकर मैनेजमेंट से मतभेद और जीएमआर ग्रुप का रुख़, पंत के इस फैसले के पीछे मुख्य कारण बताए जा रहे हैं।

नई दिल्ली: आईपीएल में ऋषभ पंत के दिल्ली कैपिटल्स छोड़कर नीलामी में शामिल होने के फैसले के पीछे वेतन विवाद नहीं है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोचिंग स्टाफ की नियुक्ति को लेकर टीम मैनेजमेंट से मतभेद ही ऋषभ के इस बड़े फैसले का कारण बना।

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दिल्ली कैपिटल्स ने पूर्व भारतीय खिलाड़ी हेमंग बदानी को मुख्य कोच और वेणुगोपाल राव को टीम डायरेक्टर नियुक्त किया था। लेकिन, इन नियुक्तियों में ऋषभ पंत की राय नहीं ली गई। पिछले सीजन में कोच रहे ऑस्ट्रेलियाई पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग की जगह हेमंग बदानी को कोच बनाया गया था।

दिल्ली कैपिटल्स में जीएमआर ग्रुप और जेएसडब्ल्यू ग्रुप की बराबर हिस्सेदारी है। समझौते के अनुसार, हर दो साल में टीम का नियंत्रण दोनों ग्रुप बदलते हैं। इस हिसाब से 2025 से 2026 तक टीम का नियंत्रण जीएमआर ग्रुप के पास होगा। जीएमआर ग्रुप ऋषभ पंत को कप्तान बनाए रखने के पक्ष में नहीं है। इसलिए उन्होंने पहले ही अक्षर पटेल को कप्तान बनाने की कोशिश की थी। जीएमआर ग्रुप ऋषभ पंत की बजाय श्रेयस अय्यर को तरजीह देता है। इसके अलावा, कोचिंग स्टाफ की नियुक्ति में उनकी राय न लेना भी ऋषभ पंत के इस फैसले का एक बड़ा कारण बना।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अगली नीलामी में ऋषभ पंत को रिकी पोंटिंग की कोचिंग वाली पंजाब किंग्स अपनी टीम में शामिल करना चाहेगी। चेन्नई सुपर किंग्स भी पंत के लिए दावेदारी पेश कर सकती है। ऐसे में ऋषभ पंत की रिकॉर्ड कीमत पर बोली लगना कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। 2016 में दिल्ली कैपिटल्स से जुड़ने के बाद से टीम ने पंत का हमेशा साथ दिया। कार दुर्घटना में चोटिल होने के बावजूद दिल्ली ने उन्हें टीम में बनाए रखा। लेकिन, सात साल तक कोच रहे रिकी पोंटिंग का टीम छोड़ना और सौरव गांगुली को पुरुष टीम के डायरेक्टर पद से हटाया जाना भी ऋषभ पंत के दिल्ली छोड़ने की वजह बना।