मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 1 जनवरी से भिखारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने का फैसला किया है। प्रशासन की योजना है भीख मांगने और देने वालों पर कार्रवाई करना और पुनर्वास कार्यक्रम चलाना।

भोपाल। भारत का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर अब अपनी सड़कों को भिखारियों से मुक्त करने के लिए बड़ा कदम उठा रहा है। जिला प्रशासन ने ऐलान किया है कि 1 जनवरी 2024 से इंदौर में भीख मांगने और देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जिला कलेक्टर आशीष सिंह ने जानकारी दी कि इस संबंध में जागरूकता अभियान दिसंबर के अंत तक चलाया जाएगा। इसके बाद नियम तोड़ने वालों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।

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जिला कलेक्टर ने क्या कहा?

कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा, "इंदौर के निवासियों से अपील है कि वे लोगों को भीख न दें और इस समस्या को बढ़ावा न दें।" इस योजना को केंद्र सरकार की पायलट परियोजना के तहत लागू किया जा रहा है, जिसमें इंदौर समेत देश के 10 शहर शामिल हैं। इस परियोजना का उद्देश्य भिखारियों का पुनर्वास करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

भिखारियों के पुनर्वास के प्रयास

इस अभियान के दौरान प्रशासन ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। परियोजना अधिकारी दिनेश मिश्रा ने बताया कि "कई भिखारियों के पास पक्के मकान हैं, और उनके बच्चे अच्छे स्थानों पर काम कर रहे हैं। कुछ भिखारी नकदी इकट्ठा करके दूसरों को ब्याज पर पैसे उधार भी देते हैं।"

समाज कल्याण मंत्री ने दिया आदेश

मध्य प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि "एक स्थानीय संगठन इन भिखारियों को छह महीने तक आश्रय देगा और उनके लिए रोजगार खोजने में मदद करेगा। सरकार का उद्देश्य लोगों को भीख मांगने की प्रवृत्ति से मुक्त कराना है।"

चौंकाने वाले आंकड़े

अभियान के दौरान एक भिखारी के पास ₹29,000 नकद मिले, जबकि कुछ अन्य लोग राजस्थान से बच्चों को लेकर इंदौर में भीख मांगने के लिए आए थे। इन्हें बचाकर प्रशासन ने सुरक्षित स्थान पर भेजा। इंदौर की यह पहल स्वच्छता के बाद सामाजिक सुधार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन को उम्मीद है कि इस योजना से शहर का माहौल और बेहतर होगा।

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