कोटपूतली में बोरवेल में गिरी बच्ची चेतना को 12 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित निकाला गया। बच्ची खेलते समय 30 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। NDRF और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर बच्ची की जान बचाई।

कोटपूतली (राजस्थान). जयपुर के कोटपूतली क्षेत्र के किरतपुरा गांव में हुए एक बड़े हादसे में बोरवेल में गिरी बच्ची चेतना को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया गया। लेकिन बच्ची की हालत खतरे में है, उसकी जान बचने की संभावना बहुत कम है। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया है। चेतना की कंडीशन को लेकर कुछ देर बाद जिला कलेक्टर हेल्थ बुलेटिन जारी करेंगे। बता दें कि बच्ची आज से ठीक 10 दिन पहले 700 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी। गिरने की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

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दोस्तों के साथ खेल-खेल में गिर गई थी मासूम

घटना के अनुसार, चेतना अपने दोस्तों के साथ खेल रही थी, जब वह अचानक खुले बोरवेल में गिर गई। बोरवेल लगभग 30 फीट गहरा था। बच्ची के गिरने की खबर गांव में फैलते ही वहां भीड़ जमा हो गई। प्रशासन ने तुरंत हरकत में आते हुए बचाव अभियान शुरू किया। ऑपरेशन में आधुनिक उपकरणों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों का भी सहयोग लिया गया।

पाइक के जरिए बच्ची को दी गई ऑक्सीजन

बचाव कार्य के दौरान बच्ची की स्थिति पर नजर रखने के लिए बोरवेल में एक कैमरा भेजा गया, जिससे पता चला कि चेतना गहराई में फंसी हुई थी लेकिन होश में थी। टीम ने ऑक्सीजन पाइप डालकर उसे सांस लेने में मदद की और उसके पास पहुंचने के लिए एक समानांतर गड्ढा खोदा।

जो 10 दिन में नहीं हुआ वो 12 घंटे में हो गया…

करीब 12 घंटे की मेहनत के बाद चेतना को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बाहर निकालने के बाद उसे तुरंत एंबुलेंस से कोटपूतली के बीडीएम अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की एक विशेष टीम बच्ची की स्वास्थ्य जांच कर रही है।

हर कोई कर रहा रेस्क्यू टीम की तारीफ

बचाव कार्य को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए एनडीआरएफ टीम, स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की सराहना हो रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए चेतना के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

इस घटना ने खुले बोरवेल की समस्या को फिर से उजागर कर दिया है। प्रशासन ने सभी ग्रामीणों से अपील की है कि वे खुले बोरवेल को बंद करें ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। चेतना की इस बचाव गाथा ने पूरे राज्य में एक राहत की भावना पैदा की है।