काशी में किन 5 तरह के शवों का नहीं होता दाह संस्कार? चौंकाने वाली है वजह
काशी में कुछ विशेष लोगों का दाह संस्कार नहीं होता! गर्भवती महिलाएं, साधु, बच्चे और सांप काटने से मरे लोगों के शवों का अंतिम संस्कार अलग तरीके से होता है। जानिए क्या हैं इसके पीछे के रहस्य!
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गर्भवती महिलाओं को भी काशी में दाह संस्कार नहीं किया जाता है. माना जाता है कि गर्भवती महिलाओं के शरीर को जलाने से पेट फूल जाता है और चिता में पेट फटने की स्थिति बन सकती है.
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काशी में साधुओं के शवों को जलाया नहीं जाता है. उनके शवों को पानी में छोड़ दिया जाता है या दफना दिया जाता है. काशी में छोटे बच्चों के शवों को भी जलाना मना है. एक बच्चा बारह साल से कम उम्र का है, तो उसे दहन नहीं करते।
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सांप काटने से मरे लोगों के शवों का काशी में दाह संस्कार नहीं किया जाता है. कहा जाता है कि सांप काटने से मरे लोगों का दिमाग 21 दिनों तक जीवित रहता है. ऐसे में, उनके शव को केले के तने में बांधकर पानी में तैरने के लिए छोड़ दिया जाता है.
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त्वचा रोग या कुष्ठ रोग से पीड़ित रोगी की मृत्यु हो जाने पर भी, उसके शव का काशी में दाह संस्कार नहीं किया जाता है. कहा जाता है कि उनके शवों को जलाने से रोग के बैक्टीरिया हवा में फैल जाते हैं, और अन्य लोग भी इस रोग के शिकार हो सकते हैं.
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शीतला माता के प्रकोप से मरे लोगों के शवों का भी दाह संस्कार नहीं किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि उन शवों को मां देवी ने स्वयं ले लिया है, इसलिए उन्हें जलाया नहीं जाता है.
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