fake news of woman’s body in blue drum in UP: यूपी पुलिस को एक चौंकाने वाली कॉल मिली: एक महिला के 15 टुकड़े करके ड्रम में सील कर दिए गए। जांच में पता चला कि यह कॉल एक बच्ची ने यूट्यूब वीडियो देखकर डर के मारे की थी।

10-year-old girl watches YouTube and calls 112: "हैलो सर, एक महिला के 15 टुकड़े कर उसे नीले ड्रम में सील कर दिया गया है!" उत्तर प्रदेश पुलिस के 112 कंट्रोल रूम में जैसे ही यह कॉल आई, पूरे सिस्टम में सनसनी दौड़ गई। एक तरफ पुलिस के लिए यह एक हाई अलर्ट की स्थिति थी, दूसरी तरफ घटनास्थल पर पहुंचते ही जो सच्चाई सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया। यह कहानी डरावनी कम और हैरान कर देने वाली ज्यादा है।

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शुक्रवार दोपहर लगभग तीन बजे यूपी 112 पुलिस को एक कॉल आया। कॉलर ने दावा किया कि फर्रुखाबाद जिले के बलीपुर गांव में एक महिला की हत्या कर दी गई है और उसके 15 टुकड़े कर के नीले रंग के ड्रम में डालकर सीमेंट से सील कर दिया गया है। इतना सुनते ही पुलिस की टीमें सक्रिय हो गईं और तुरंत लोकेशन ट्रेसिंग शुरू हुई।

जांच में निकला बड़ा ट्विस्ट, कॉल निकला फर्जी

बलीपुर गांव पहुंची पुलिस टीम को वहां ऐसा कुछ भी नहीं मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलर का मोबाइल ट्रैक किया गया और उसकी पहचान उत्तम कुमार, निवासी पकरा, याकूतगंज के रूप में हुई। शाम तक पुलिस उत्तम को थाने लेकर आई और पूछताछ शुरू की।

जांच में जो सामने आया उसने सभी को चौंका दिया। उत्तम कुमार पंचायतीराज विभाग में सफाई कर्मचारी हैं और जब वो अपनी पत्नी नीतू के साथ बाजार गए थे, तभी उनकी 10 साल की बेटी ने मोबाइल उठाकर 112 पर कॉल कर दी। पूछताछ में बच्ची ने बताया कि उसने यूट्यूब पर एक वीडियो देखा जिसमें महिला के टुकड़े कर ड्रम में डाले जा रहे थे। बस इसी से डरकर उसने झूठी सूचना पुलिस को दे दी।

यूट्यूब वीडियो बना कॉल का कारण

पुलिस के मुताबिक बच्ची पांचवीं क्लास में पढ़ती है और उस दिन घर पर अकेली थी। उसे जो कुछ यूट्यूब वीडियो में दिखा, उसने उसे सच मान लिया और बिना सोचे-समझे 112 पर कॉल कर दिया। अब पुलिस कॉल की रेकॉर्डिंग की भी जांच कर रही है ताकि पुष्टि की जा सके कि वाकई कॉल बच्ची ने ही की थी।

प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार ने बताया कि पूरे मामले की जांच जारी है और कॉल सेंटर की रेकॉर्डिंग चेक की जाएगी। साथ ही, पुलिस अब इस बात पर भी काम कर रही है कि ऐसी झूठी कॉल्स के लिए भविष्य में क्या सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि संसाधनों की बर्बादी ना हो और असली इमरजेंसी में मदद रुक न जाए।

समझदारी की जरूरत: बच्चों को डिजिटल कंटेंट से कैसे बचाएं

इस घटना ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि बच्चों को मोबाइल और यूट्यूब जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अनफिल्टर्ड एक्सेस देना कितना खतरनाक हो सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे न केवल बच्चों की डिजिटल एक्टिविटी पर नजर रखें, बल्कि उन्हें समझाएं कि कौन सी जानकारी सच होती है और कौन सी सिर्फ इंटरनेट की कहानी।

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