यूपी की जेलों से तमाम तरह की अनियमितताएं सामने आने के बाद अब जांच का दौर जारी है। इसी कड़ी में आईपीएस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों को दस दिन के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी।

लखनऊ: यूपी की जेलों में बंद माफियाओं के खिलाफ सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। प्रदेश की जेलों के निरीक्षण को लेकर 5 आईपीएस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। आईपीएस अधिकारियों को जिला प्रशासन और पुलिस से भी फीडबैक लेना होगा। इसी के साथ दस दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

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इन पांच अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी

आपको बता दें कि डीजी जेल एसएन साबत की ओर से यह आदेश जारी किया गया है। जिसमें बताया गया कि आईपीएस शिवहरि मीना, हिमांशु कुमार, हेमंत कुटियाल, सुभाष चंद्र शाक्य, राजेश कुमार कुमार श्रीवास्तव को प्रदेश की जेलों का निरीक्षण करना है। अधिकारियों को जिला कारागार चित्रकूट, केंद्रीय कारागार नैनी, जौनपुर और आजमगढ़ जिला कारागा, सोनभद्र और वाराणसी जिला कारागार, जिला कारागार बलिया, बांदा, मऊ, फतेहपुर का निरीक्षण करना होगा। इस बीच कारागार के कार्य, अनियमितताओं, अवांछित गतिविधियों आदि के खिलाफ दस दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

जेल से सामने आई थीं अनियमितताएं

गौरतलब है कि बीते दिनों यूपी की जेलों से कई चौंकाने वाला मामले सामने आए थे। पहले चित्रकूट जिले से माफिया मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी और उनकी पत्नी निखत के नियमविरुद्ध मुलाकात का मामला सामने आया। इसके कुछ ही दिन बाद उमेश पाल हत्याकांड केस सामने आने पर जांच में बरेली जेल से भी कई अनियमितताएं सामने आईं। पता लगा कि जेल के भीतर माफिया अतीक अहमद के भाई अशरफ से नियमों को ताक पर रखकर लोगों की मुलाकात करवाई जाती थी। तमाम अनियमितताएं सामने आने के बाद जेल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन भी देखने को मिला था। आरोप यह भी लगा था कि जेल के भीतर माफियाओं को वीआईपी सुविधाएं दी जा रही हैं और उसमें जेल अधिकारियों की भी मिली भगत रहती थी। जिसके बाद शासन स्तर से भी नाराजगी सामने आई थी। उसी के बाद अब आईपीएस अधिकारियों को जांच सौपी गई है।

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