DM action on private school in UP: कानपुर के एक स्कूल पर गैर-ज़रूरी विषय थोपने का आरोप लगा। डीएम के दखल के बाद स्कूल ने विषय को अनिवार्य नहीं बताया और कहीं से भी किताब खरीदने की अनुमति दी।

Kanpur student complaint against school: नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही देशभर के स्कूलों में छात्र और अभिभावक नई कक्षा की तैयारियों में जुटे हैं। लेकिन इसी बीच कानपुर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छठी कक्षा की एक छात्रा ने अपने पिता के साथ मिलकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जिला अधिकारी से शिकायत की और देखते ही देखते स्कूल प्रशासन को झुकना पड़ा।

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गैर-आवश्यक विषय जबरन थोपने का आरोप

कानपुर के सेंट मैरी कॉन्वेंट हाई स्कूल की एक छात्रा ने आरोप लगाया कि स्कूल ने एक गैर-आवश्यक विषय "फैशन डिजाइनिंग" को अनिवार्य बनाकर छात्रों पर थोपा है। यह विषय न तो ICSE बोर्ड के अनिवार्य पाठ्यक्रम में शामिल है, न ही इसका शैक्षणिक औचित्य स्पष्ट है। छात्रा के पिता अमित कुमार निरंजन ने डीएम को दी गई शिकायत में बताया कि इस विषय की किताब मात्र 14 पन्नों की है, लेकिन उसकी कीमत 210 रुपये रखी गई है।

स्कूल टीचर की लिखी किताब, सिर्फ एक ही दुकान पर उपलब्ध

शिकायत में यह भी कहा गया है कि यह पुस्तक स्कूल के ही एक शिक्षक द्वारा लिखी गई है और इसकी बिक्री पर एकाधिकार सिर्फ एक डिस्ट्रीब्यूटर को दिया गया है। आरोप है कि पुस्तक की गुणवत्ता बेहद खराब है, साथ ही इसमें तथ्यात्मक और शैक्षणिक त्रुटियां भी हैं। अभिभावकों का कहना है कि यह पूरा मामला जानबूझकर मुनाफाखोरी के इरादे से रचा गया है, जहां स्कूल और डिस्ट्रीब्यूटर मिलकर अत्यधिक मुनाफा कमा रहे हैं।

डीएम के दखल पर बदली स्कूल की नीति

जब छात्रा अपने पिता के साथ जिला अधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के पास पहुंची, तो डीएम ने शिकायत पर तुरंत संज्ञान लेते हुए स्कूल में टीम भेजी। कार्रवाई के डर से स्कूल प्रशासन ने लिखित रूप से जवाब देते हुए कहा कि यह विषय अनिवार्य नहीं है और छात्र कहीं से भी किताबें खरीद सकते हैं। साथ ही, स्कूल ने यह भी कहा कि प्रिंसिपल हमेशा अभिभावकों की शिकायतें सुनने के लिए उपलब्ध रहते हैं।

छात्रा और पिता ने डीएम को दिया धन्यवाद

मामले के निपटारे के बाद छात्रा और उनके पिता ने दोबारा डीएम से मुलाकात कर उनका आभार जताया। यह घटना दर्शाती है कि एक छोटी सी आवाज भी बड़ा बदलाव ला सकती है, यदि उसे सही मंच पर उठाया जाए।

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