उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी ज़ोरों पर है। 424 पृष्ठों की नियमावली में बदलाव की संभावना, केंद्रीय कानूनों से मेल खाते प्रावधानों को हटाया जा सकता है। उत्तराखंड UCC लागू करने वाला पहला राज्य बनने की ओर अग्रसर।

पूरे देश में UCC लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, बीते सोमवार को उत्तरप्रदेश विधानसभा शीतकालीन सत्र में सीएम योगी ने इसका समर्थन किया, वहीं अब उत्तराखंड में (UCC) समान नागरिक संहिता को लागू करने की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है। बता दें की उत्तराखंड सरकार ने विधानसभा से इसे पारित कर राष्ट्रपति की मंजूरी भी प्राप्त कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार शासन द्वारा तैयार की जा रही नियमावली के प्रारूप में बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि इसे प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जा सके। 424 पृष्ठों की इस नियमावली में कई ऐसे प्रावधान हैं, जो केंद्रीय कानूनों का दोहराव करते हैं, जिन्हें हटाने और आवश्यक संशोधन करने पर मंथन जारी है।

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नियमावली में संशोधन और प्रस्तावित बदलाव

विधि एवं न्याय विभाग की समीक्षा में पाया गया कि कई प्रावधान केंद्रीय कानूनों से मेल खाते हैं, खासकर उत्तराधिकार और विवाह संबंधी मुद्दों पर। इन बिंदुओं को हटाकर नियमावली को सरल और स्पष्ट बनाने की सिफारिश की गई है, ताकि आम जनता के लिए इसे लागू करना आसान हो। इसके अलावा, वित्त विभाग के साथ मिलकर अर्थदंड की व्यवस्था पर भी विचार-विमर्श चल रहा है, ताकि यह कानूनी रूप से सही और भविष्य में विवादों से मुक्त रहे।

उत्तराखंड बनेगा UCC लागू करने वाला पहला राज्य

उत्तराखंड सरकार की यह पहल देश भर में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, क्योंकि राज्य सबसे पहले समान नागरिक संहिता को लागू करने जा रहा है। इस कानून के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, और गोद लेने जैसे मुद्दों को एक समान कानूनी ढांचे में लाया जाएगा, जिससे राज्य में कानून व्यवस्था को और बेहतर किया जा सकेगा। राज्य सरकार के इस कदम को देश भर में एक मिसाल माना जा रहा है, और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के बाद उत्तराखंड, UCC लागू करने वाला पहला राज्य बनेगा।

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