डिजिटल डेटा सुरक्षा के लिए नए नियम आ रहे हैं, जिससे लोगों की निजी जानकारी सुरक्षित रहेगी। आईटी कंपनियों पर कड़ी नज़र रखी जाएगी और जुर्माने का प्रावधान भी होगा। बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी ज़ोर दिया गया है।

नई दिल्ली: आईटी कंपनियां और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डेटा सुरक्षा नियमों को लागू करने की तैयारी में केंद्र सरकार है। डिजिटल मीडिया पर लोगों की निजी जानकारी के दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाए गए डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल में आईटी कंपनियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नए नियम बनाए गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया कि डिजिटल डेटा पर सरकार के नए नियमों का असर मीडिया पर नहीं पड़ेगा।

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केंद्र सरकार का दावा है कि डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन कानून का मकसद लोगों की आजादी और देश की सुरक्षा को मजबूत करना है। मंत्री ने कहा कि इस कानून से देश के नागरिकों की निजी जानकारी की चोरी और दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। इसलिए बिल में डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड बनाने का सुझाव दिया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि निजी जानकारी पर सरकार की सख्ती से लोग गैरकानूनी कामों में कम शामिल होंगे और उन्हें शोषण से बचाया जा सकेगा।

इसके अलावा, बिल में साइबर दुनिया में बच्चों की प्राइवेसी की सुरक्षा के लिए भी नियम बनाए गए हैं। बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाने के लिए माता-पिता की पहचान की जाँच करना भी इसी का हिस्सा है। अगर किसी की निजी जानकारी लीक होती है, तो आईटी कंपनियों को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। कंपनियों को 250 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। जानकारी लीक होने पर इसकी सूचना संबंधित व्यक्ति और केंद्रीय बोर्ड को देनी होगी। ऐसा न करने पर भी जुर्माना लगेगा। डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड को निजी जानकारी लीक होने के मामलों में आईटी कंपनियों के खिलाफ खुद से केस दर्ज करने का अधिकार भी होगा।

छोटे और मध्यम उद्योगों को बचाने के लिए, जानकारी लीक होने पर जुर्माना उसके हिसाब से लगाया जाएगा। लेकिन बड़ी आईटी कंपनियों से पूरा जुर्माना वसूला जाएगा।