दक्षिण कोरिया के एक मंदिर में 27 साल पहले हुई चोरी के लिए एक गुमनाम पत्र मिला है जिसमें माफ़ी मांगी गई है और 20 लाख वॉन दान किए गए हैं। पत्र लिखने वाले ने बताया कि कैसे एक भिक्षु की दया ने उसकी ज़िंदगी बदल दी और अब वो ईमानदारी से जी रहा है।

क्षिण कोरिया के एक मंदिर के कर्मचारियों को हाल ही में मंदिर के दान पात्र से एक गुमनाम पत्र मिला। उस पत्र में 27 साल पहले हुए एक चोरी के लिए माफ़ी मांगी गई थी। इतना ही नहीं, पत्र के साथ 20 लाख वॉन (करीब 1.5 लाख रुपये) भी दान पात्र में रखे गए थे। बचपन में मंदिर के दान पात्र से पैसे चुराने वाले एक शख्स ने इतने सालों बाद इस तरह से प्रायश्चित किया। 

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पत्र में उस गुमनाम शख्स ने अपनी चोरी के बारे में विस्तार से बताया है। 1997 में एशियाई आर्थिक संकट के दौरान उसने ग्योंगसांग प्रांत के टोंगडो मंदिर के जाजंगम हर्मिटेज से 30,000 वॉन (करीब 23 डॉलर) चुराए थे। पत्र में उसने बताया कि कुछ दिनों बाद उसने फिर से चोरी करने की कोशिश की, लेकिन एक भिक्षु ने उसे पकड़ लिया। मगर, उस भिक्षु ने उसे पुलिस के हवाले नहीं किया और न ही भीड़ के हवाले किया। बल्कि, उन्होंने उसे दिलासा दिया और घर भेज दिया। पत्र में उसने लिखा है कि वो उसकी ज़िंदगी का एक अहम मोड़ था जिसने उसके नज़रिए और ज़िंदगी को बदल दिया। उसके बाद से उसने कभी भी किसी और की चीज़ की चाहत नहीं की। 

उसने पत्र में अपनी मौजूदा नौकरी या नाम का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन उसने लिखा कि आज वो कड़ी मेहनत से अच्छी ज़िंदगी जी रहा है। उसने आगे लिखा कि वो जल्द ही पिता बनने वाला है और वो अपने बच्चे के लिए एक अच्छा और ईमानदार पिता बनना चाहता है, इसलिए उसने माफ़ी मांगने का फैसला किया। कोरियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 20 अगस्त को मंदिर के एक कर्मचारी को पत्र और दान मिला। कोरियन टाइम्स ने यह भी बताया कि मंदिर के एक भिक्षु, वेनेरेबल ह्योनमुन ने कहा है कि उन्हें सालों पहले ऐसा ही एक लड़का याद है।