हिंदू समाज में अस्थि विसर्जन क्रिया के बाद ही पवित्र नदियों के घाट पर अंतिम संस्कार पूरा होता है। लेकिन मौजूदा लॉकडाउन की स्थितियों में लोगों को अपने पितरों की अंतिम इच्छा पूरी करने में समस्या हो रही है। कानपुर के लोगों के लिए शहर में खुला एक विशेष बैंक ऐसी अवस्था में सहारा बन रहा है। इस बैंक में स्वजन अपने मरणोपरांत क्रिया के बाद अंतिम इच्छा को लॉक कर रहे हैं और लॉकडाउन खुलते ही उसे पूरी करेंगे।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में मृत्यु के बाद अपने पितरों की अस्थियां संगम, हरिद्वार या अपने इच्छा अनुसार अन्य स्थानों पर प्रवाहित करने वाले लोगों के लिए अस्थि कलश बैंक काफी मददगार साबित हो रहा है। लॉकडाउन में इस समय वह अस्थि विसर्जन के लिए कहीं जा नहीं पा रहे हैं ,वहीं हिन्दू मान्यता के अनुसार वह अस्थि कलश घर में भी नहीं रख सकते। ऐसे में कानपुर के भैरोघाट पर स्थित अस्थि कलश बैंक में वह अपने पितरों की अंतमि इच्छा को लॉकडाउन कर रहे हैं। लॉकडाउन की अवधि समाप्ति होने के बाद वह अस्थि अपनी इच्छानुसार विसर्जित करेंगे।
2104 में हुई थी अस्थि कलश बैंक की स्थापना
कानपुर के भैरोघाट पर निःशुल्क अस्थि कलश बैंक की स्थापना देहदान व नेत्रदान अभियान के संयोजक मनोज सेंगर ने समन्वय सेवा समिति के संयोजक संतोष अग्रवाल के सहयोग से वर्ष 2014 में की थी। इसे युग दधीचि देहदान संस्थान संचालित करता है। ये बैंक अंत्येष्टि क्रिया करने वाले उन लोगों के लिए मददगार बना है जो लॉकडाउन के कारण अस्थि कलश विसर्जन के लिए वाराणसी, हरिद्वार या अन्य तीर्थ क्षेत्र नहीं ले जा पा रहे हैं। अब वे अस्थियों को अस्थि कलश बैंक में जमा करा रहे हैं। 23 मार्च से शुरू लॉकडाउन अवधि में ही अभी तक करीब 60 अस्थि कलश यहां बने लॉकरों में जमा हो चुके हैं।
कार्ड दिखा कर ले सकेंगे अस्थियां
लॉकडाउन में लोग अस्थि कलश बैंक में गुजर चुके अपने स्वजनों की अस्थियां जमा कर रहे हैं। लॉकडाउन खुलने पर वह लोग अपनों की अंतिम इच्छा पूरी कर सकेंगे। अस्थि कलश बैंक में अस्थियों का कलश नाम के अनुसार ताला बंद बॉक्स में रखा जा रहा है। इस बैंक की सेवा निःशुल्क है, अस्थि कलश जमा करने वाले व्यक्ति को एक कार्ड दिया जाता है जिस पर लॉकर नंबर लिखा होता है। कार्ड दिखाने पर अस्थि कलश ले सकते हैं।
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