शांतनु नायडू का जन्म 1993 में पुणे में हुआ था। उन्होंने 2014 में सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया।
इंजीनियरिंग के बाद शांतनु नायडू ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी (Johnson Graduate School of Management) से MBA किया।
MBA के दौरान शांतनु नायडू को हेम्मेटर एंटरप्रेन्योरशिप अवॉर्ड और जॉनसन लीडरशिप केस कॉम्पिटीशन जैसे प्रतिष्ठित अवॉर्ड मिले।
2018 में शांतनु नायडू ने रतन टाटा के असिस्टेंट के रूप में करियर शुरू किया। उन्होंने टाटा ग्रुप के कई बड़े प्रोजेक्ट्स में काम किया और स्टार्टअप इन्वेस्टमेंट में सलाह दी।
शांतनु नायडू ने हाल ही में टाटा मोटर्स में जनरल मैनेजर और हेड - स्ट्रैटेजिक इनिशिएटिव्स की नई भूमिका शुरू की।
शांतनु नायडू टाटा ग्रुप में अपनी सीनियर पोजीशन के कारण अच्छी-खासी सैलरी और बोनस पाते हैं।रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी सैलरी 8 से 10 लाख रुपये प्रति माह बताई जाती है।
शांतनु नायडू Goodfellows नाम की कंपनी के मालिक भी हैं, जो बुजुर्गों की मदद के लिए काम करती है। उनकी कंपनी की कुल संपत्ति लगभग 5 करोड़ रुपये बताई जाती है।
शांतनु नायडू और रतन टाटा का रिश्ता सिर्फ प्रोफेशनल नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी बहुत खास था।रिपोर्ट के मुताबिक, रतन टाटा ने अपनी वसीयत में शांतनु नायडू का नाम शामिल किया था।
रतन टाटा ने शांतनु नायडू के स्टार्टअप Goodfellows में अपनी हिस्सेदारी भी छोड़ दी थी और उनकी शिक्षा से जुड़ा कर्ज भी माफ कर दिया।
शांतनु नायडू कुत्तों से बहुत प्यार करते हैं और बेघर जानवरों के लिए एक NGO शुरू करना चाहते थे। फंडिंग की समस्या आने पर, उनके पिता ने उन्हें रतन टाटा को पत्र लिखने की सलाह दी।
दो महीने बाद, रतन टाटा ने शांतनु नायडू को मिलने के लिए मुंबई बुलाया और उनके काम से प्रभावित होकर उनके प्रोजेक्ट में निवेश किया। इसके बाद, नायडू टाटा के करीबी सहयोगी और सहायक बन गए।
9 अक्टूबर 2024 को रतन टाटा का मुंबई में निधन हो गया। तब, शांतनु नायडू ने लिखा-"इस दोस्ती के जाने से जो खालीपन मेरे दिल में आ गया है, उसे मैं अपनी पूरी जिंदगी भरने की कोशिश करूंगा।