क्या आप जानते हैं कि कॉटन प्लांट अब घर की बालकनी या टैरेस में भी आसानी से उगाया जा सकता है? इससे मिलने वाली शुद्ध रुई आप सीधे पूजा-पाठ में इस्तेमाल कर सकते हैं।
कॉटन प्लांट एक नेचुरल फाइबर देने वाला पौधा है, जिसके फल पकने पर उनमें से सफेद-सफेद रुई बाहर आती है। यह पौधा मीडियम साइज का होता है और इसे गमले में भी उगाया जा सकता है।
बीज लगाने से पहले 8–10 घंटे गुनगुने पानी में भिगो दें। इससे जर्मिनेशन 90% तक बढ़ जाती है। ध्यान रखें एक ही गमले में बीज बोएं और बाद में शिफ्ट न करें।
सबसे बढ़िया मिक्स 40% गार्डन सॉइल, 30% वर्मी कम्पोस्ट, 20% रेत और 10% कोकोपीट है। इसे न्यूनतम 12–14 इंच गहरा गमले में भरकर नीचे ड्रेनेज होल करें।
रोज 6–8 घंटे डायरेक्ट सनलाइट दें। सर्दियों में फुल सन जरूरी है क्योंकि शेड में कॉटन नहीं फलेगा। हफ्ते में 2–3 बार पानी जरूर दें। लेकिन ज्यादा पानी से फूल झड़ते हैं।
हर 15 दिन में एक बार छाछ (Buttermilk) और पानी = 1:10 के रेशियो से डालें। या फिर सरसों खली का पानी दें। इससे ज्यादा बॉल (cotton boll) बनेंगे।
कैल्शियम और पोटैशियम की कमी से फूल झड़ते हैं। ऐसे में केले के छिलके का पानी और अंडे के छिलके का पाउडर (थोड़ा सा) प्लांट में डालें।
कीड़े न लगें इसके लिए घरेलू स्प्रे तैयरा करें। हर 10–15 दिन में स्प्रे करें। नीम तेल और पानी (5 ml / लीटर) या लहसुन और मिर्च का पानी बनाएं। इससे एफिड्स और कीड़े दूर रहेंगे।
फूल से फल बनने में 15–20 दिन लगते हैं। फिर फल से रुई बाहर आने में 40–50 दिन लगेंगे। जल्दी छेड़छाड़ न करें। इस रुई को धूप में 1–2 दिन सुखाएं और प्लास्टिक में बंद न करें।