शादी में दुल्हनें सोने का हार, झुमका, कंगन, मांगटीका और नथिया से सजे नजर आती हैं। पहली नजर में ये धन और सामाजिक हैसियत का शो दिखता है। लेकिन इसके पीछे आध्यात्मक अर्थ छिपा है।
हिंदू दर्शन में सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि पवित्रता, ऊर्जा और दिव्य समृद्धि का प्रतीक है। दुल्हन को सोने से सजाना समृद्धि के साथ-साथ आंतरिक मूल्यों की भी याद दिलाता है।
वेदों में सोने को हिरण्य कहा गया है, जो सूर्य, जीवन शक्ति और ऊर्जा से जुड़ा माना जाता है। सोने को ऐसी धातु माना गया है जो ऊर्जा को ग्रहण कर उसे मन-शरीर में प्रवाहित करते हैं।
विवाह के समय दुल्हन का सोना पहनना प्रतीकात्मक है, यह विश्वास किया जाता है कि इससे वह नए घर और नई जिम्मेदारियों में सकारात्मक ऊर्जा के साथ प्रवेश करती है।
सोना मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन और प्रकाश फैलाने की क्षमता का प्रतीक है, ये सभी गुण रिश्तों को संवारने और परिवार को दिशा देने के लिए आवश्यक हैं।
सोना एनर्जी का कंडक्टर है, वैसे ही हमारे भीतर के गुण, दया, धैर्य और क्लीयरिटी जीवन के हर पहलू में ऊर्जा का संचार करते हैं।
मंगलसूत्र, जो विवाह के समय बांधा जाता है, कमिटमेंट और प्योरिटी का पावरफुल प्रतीक है। सोने की मजबूती उस दृढ़ता को दिखाती है, जो रिश्तों को निभाने के लिए चाहिए।
श्रृंगार केवल बाहरी नहीं होता। सोना एक जीवंत रूपक बन जाता है। जैसे दुल्हन का सोना नजरें खींचता है, वैसे ही हमारे कर्म, नीयत सम्मान और सकारात्मक एनर्जी को अट्रैक्ट करता है।