साड़ी सिर्फ पहनावा नहीं, बल्कि ग्रेस, एलिगेंस और प्रैक्टिकल फैशन का कॉम्बिनेशन है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि साड़ी के नीचे जो फॉल (Fall) लगाई जाती है, वह क्यों जरूरी होती है?
नई साड़ियों की लंबाई ज्यादा होती है, जिससे किनारे जमीन पर घिसते हैं। बॉर्डर जल्दी खराब हो जाता है। फॉल लगाने से साड़ी की लंबाई परफेक्ट लेवल पर आ जाती है और चलने में आराम रहता है।
कई महिलाएं इसे सिर्फ टेलर की सलाह मानकर लगवा लेती हैं, जबकि इसके पीछे मजबूत वजहें और फायदे छुपे हैं। यहां आसान भाषा में समझें।
सिल्क, बनारसी या कांजीवरम जैसी महंगी साड़ियों में फॉल एक सेफ्टी लेयर का काम करता है। बॉर्डर जल्दी फटता नहीं, धागे नहीं निकलते और साड़ी लंबे समय तक नई जैसी रहती है।
अगर साड़ी में फॉल न हो तो प्लीट्स ढीली और बिखरी हुई लग सकती हैं। फॉल से प्लीट्स में वजन आता है। कमर के पास साड़ी चिपकती नहीं है और बैठने–उठने में साड़ी सेट रहती है।
हल्की और पतली साड़ियों में अंदर की पेटीकोट या पैरों की शेप दिखने लगती है। फॉल लगाने से साड़ी ज्यादा ओपेक दिखती है। पहनने वाला ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस करता है।
फॉल के बिना साड़ी बार-बार पैरों में उलझ सकती है। फॉल लगाने से साड़ी पैरों से चिपकती नहीं है और चलना आसान हो जाता है। साथ ही लंबे समय तक पहनने में थकान नहीं होती है।
शिफॉन, जॉर्जेट, क्रेप, नेट और हल्की सिल्क साड़ी में फॉल जरूर लगवाएं। भारी बॉर्डर वाली साड़ियों में कभी-कभी फॉल की जरूरत कम होती है, लेकिन लगाने से नुकसान नहीं होता।
सही फॉल के लिए साड़ी से 1 शेड गहरा चुनें। साथ ही हमेशा फॉल कॉटन या सिल्क ब्लेंड फैब्रिक में चुनेंगे तो ये पहनने पर कमाल लगेगी।