केरल की पहली महिला DGP रेड श्रीलेखा ने IPS से राजनीति तक का साहसी सफर तय किया। CBI रेड, महिला अधिकारों की लड़ाई और अब तिरुवनंतपुरम मेयर बनने की दहलीज़ पर-सत्ता और संघर्ष की कहानी।
तिरुवनंतपुरम की सियासत में इन दिनों सबसे ज़्यादा चर्चा में नाम है-‘रेड श्रीलेखा’। इस रिटायर्ड IPS अफसर ने स्थानीय निकाय चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया।वह पहली BJP मेयर बनने जा रही हैं।
1987 बैच की IPS श्रीलेखा ने सस्थमंगलम वार्ड से लेफ्ट कैंडिडेट को 700 वोटों से हराया। यहां पहली बार BJP के नेतृत्व वाला NDA तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन पर दावा कर रहा है।
25 दिसंबर 1960 को तिरुवनंतपुरम में जन्मी श्रीलेखा ने कॉटन हिल गर्ल्स स्कूल से पढ़ाई की। इंग्लिश लिटरेचर में MA के बाद लेक्चरर और RBI में नौकरी की, लेकिन बाद में पुलिस सेवा चुनी।
जनवरी 1987 में श्रीलेखा केरल कैडर की पहली महिला IPS बनीं। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि शुरुआती 10 सालों में उन्हें महिला होने के कारण सिस्टम से दोगुनी लड़ाई लड़नी पड़ी।
CBI में 4 साल के दौरान ताबड़तोड़ रेड और आर्थिक अपराधों पर सख्त फैसलों ने उन्हें ‘रेड श्रीलेखा’ बना दिया।केरल और दिल्ली में SP व DIG रहते हुए कई हाई-प्रोफाइल मामलों में कार्रवाई की।
श्रीलेखा महिलाओं से भेदभाव और यौन उत्पीड़न पर खुलकर बोलीं। PSC भर्ती में केवल पुरुष नियम हटाने के लिए पत्र लिखे। महिला पुलिसकर्मियों का प्रतिनिधित्व 4% से बढ़कर 9% हो गया।
2003 के किलीरूर सेक्स स्कैंडल में प्रभावशाली आरोपियों पर एक्शन हो या 2013 का अन्नपूर्णा घोटाला-श्रीलेखा के फैसले हमेशा चर्चा में रहे। उन्हें विरोध, धमकियां और अफवाहें झेलनी पड़ीं।
33 साल सेवा के बाद श्रीलेखा केरल की पहली महिला DGP बनीं। जेल सुधार,अग्निशमन सेवाओं के आधुनिकीकरण और आपदा प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई। 2020 में बिना औपचारिक विदाई के रिटायर हो गईं।
क्टूबर 2024 में बीजेपी जॉइन करने के बाद श्रीलेखा ने कहा कि पीएम मोदी का नेतृत्व उन्हें प्रेरित करता है। क्या रेड श्रीलेखा तिरुवनंतपुरम की पहली BJP मेयर बनकर एक नया इतिहास लिखेंगी?