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कैसे स्वभाव वाली पत्नी बन सकती है पति की मृत्यु का कारण?

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क्या लिखा है आचार्य चाणक्य ने?

आचार्य चाणक्य ने अपनी एक नीति में बताया है कि कैसे स्वभाव वाली स्त्री के साथ रहना पति के लिए मृत्यु का कारण बन सकता है। जानिए क्या लिखा है आचार्य चाणक्य ने इस नीति में…

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चाणक्य नीति का श्लोक

दुष्टा भार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः
ससर्पे गृहे वासो मृत्युरेव न संशयः
अर्थ- दुष्ट पत्नी, धूर्त मित्र, उत्तर देने वाला सेवक ,सांप वाले घर में रहना, ये सभी मृत्यु के कारण हैं

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कैसी पत्नी बन सकती है मृत्यु का कारण?

आचार्य चाणक्य के अनुसार, दुष्ट पत्नी से हमेशा बचकर रहना चाहिए। ऐसी स्त्री अपने हित के लिए पति का बुरा करने से भी पीछे नहीं हटती और उसकी मृत्यु का कारण भी बन सकती हैं।

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कैसे दोस्त से बचकर रहें?

धूर्त मित्र यानी धोखा देने दोस्त से भी बचकर रहें। ऐसे मित्र किसी के सगे नहीं होते, अपने थोड़े से फायदे के लिए ये किसी का अहित कर सकते हैं। इनके साथ रहना मृत्यु के समान है।

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कैसे सेवक को घर में न रखें?

आचार्य चाणक्य के अनुसार, जो सेवक अपने मालिक की बात न मानें और पलटकर जवाब देने लगे उसे तुरंत निकाल देना चाहिए। ऐसे नौकर कभी भी मालिक की मृत्यु का कारण बन सकते हैं।

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कैसे घर में न रहें?

जिस घर में सांप रहता है, ऐसे घर में भूलकर भी नहीं रहना चाहिए। जाने-अनजाने में सांप पर पैर रखने से सांप पलटकर हमला भी कर सकता है, जिससे आपकी जान भी जा सकती है।

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