भारत की राजधानी नई दिल्ली के अलावा इससे सटे अन्य राज्यों में भी वायु प्रदूषण चिंता का विषय बना हुआ है। हवा में जहर का ऐसा असर है कि लोगों में सांस से संबंधित बीमारियां देखने को मिल रही है। 

नई दिल्ली: पूरी दुनिया में ही प्रदूषित हवा एक गंभीर समस्या है। बात अगर भारत की करें तो दिवाली के बाद हवा और भी ज्यादा प्रदूषित हो जाती है। सरकार की अपील के बाद भी लोग पटाखे जलाते हैं, जिसका नतीजा फिलहाल भारत की राजधानी नई दिल्ली में देखने को मिल रहा है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं उन पांच देशों के बारे में जहां सरकार ने जरुरी कदम उठाकर वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने में सफलता हासिल की थी। 

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लंदन 
इस देश में वायु प्रदूषण का मुख्य कारण पेट्रोल-डीजल से चलने वाली गाड़ियां थी। इसके बाद सरकार ने टॉक्सिक चार्ज नाम से फाइन लेना शुरू किया। जो भी डीजल या पेट्रोल की गाड़ी में पकड़ा जाता है, उससे दस पाउंड यानी 911 रुपए वसूले जाते हैं। इसके बाद से वहां प्रदूषण का स्तर काफी कम हुआ है।

चीन 
ये वही देश है, जहां से दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल ने ऑड-इवन का आईडिया चुराया है। नई दिल्ली से पहले चीन में जब प्रदूषण का स्तर खतरनाक लेवल में पहुंचा था, तब बीजिंग में सरकार ने ऑड-इवन शुरू किया था। साथ ही वहां डीजल वाहनों पर प्रतिबंध है। लोगों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

नीदरलैंड
यहां लोग प्रदूषण कम करने के लिए ज्यादातर साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। जबकि सरकार लगातार इस कोशिश में है कि 2025 तक पेट्रोल और डीजल की जगह सभी वाहन बिजली और हाइड्रोजन से चले।

पेरिस 
जान 2015 में यहां वायु प्रदूषण बढ़ा था, तब इस देश ने भी ऑड-इवन अपनाया था। साथ ही पब्लिक ट्रॉन्सपोर्ट भी फ्री कर दिया गया था। तब से आज तक यहां हर महीने के एक संडे को कार मुक्त रखा जाता है। 

जर्मनी 
इस देश में लोगों से प्रदूषण के लिए कार्बन फाइन वसूला जाता है। पैसे देने के डर से लोग ऐसे वाहन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे ज्यादा प्रदूषण नहीं होता।