बांग्लादेश ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। हसीना पर मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के आरोप हैं, और उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हुआ है। भारत सरकार को बांग्लादेश हाई कमीशन से नोट वर्बल मिला है।

GoI on Bangladesh diplomatic note: बांग्लादेश ने एक डिप्लोमैटिक नोट में भारत सरकार से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है। बांग्लादेश में इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल ने हसीना का अरेस्ट वारंट जारी किया है। उधर, भारतीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि हमें प्रत्यर्पण अनुरोध के संबंध में सोमवार को बांग्लादेश हाईकमीशन से एक नोट वर्बल प्राप्त हुआ है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस संबंध में अधिकारियों ने कोई कमेंट न करने की बात कही है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा: हम पुष्टि करते हैं कि हमें प्रत्यर्पण अनुरोध के संबंध में आज बांग्लादेश उच्चायोग से एक नोट वर्बल प्राप्त हुआ है। फिलहाल, इस मामले पर हमारे पास कोई टिप्पणी नहीं है।

तख्तापलट के बाद बांग्लादेश से भागकर तत्कालीन पीएम शेख हसीना ने भारत में शरण ली है। 16 साल से सत्ता में रहीं शेख हसीना और उनके मंत्रियों, खास ब्यूरोक्रेट्स, सैन्य अधिकारियों व सलाहकारों के खिलाफ ढाका के इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल ने अरेस्ट वारंट जारी किया है। इनके खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार का आरोप है।

विदेश सचिव स्तर पर बातचीत के बाद बांग्लादेश ने भेजा संदेश

दरअसल, शेख हसीना की वापसी के लिए राजनयिक नोट बांग्लादेश ने बीते दिनों भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री के दौरे के बाद भेजा है। विदेश सचिव मिस्री, बांग्लादेश में अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता के अलावा वहां की अंतरिम सरकार के प्रमुख नोबल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस से भी मुलाकात की थी। मिस्री ने बांग्लोदश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों का मुद्दा भी उठाया था। मुख्य सलाहकार के ऑफिस ने बताया था कि शेख हसीना के भारत में रहने पर भी चर्चा की गई थी। मुहम्मद यूनुस ने तब कहा था कि हमारे लोग चिंतित हैं क्योंकि वह वहां से कई बयान दे रही हैं। इससे तनाव पैदा होता है।

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