चीन ने अंतरिक्ष में पौधों और कवक के बीज भेजे हैं। चीन का मकसद इनका जिन म्यूटेशन कराना है। अंतरिक्ष में कॉस्मिक रेडिएशन के चलते जीन म्यूटेशन तेजी से होता है। 

चीन मैनड स्पेस एजेंसी (CMSA) ने बताया है कि उसने अपने शेनझोउ-16 मानवयुक्त अंतरिक्ष यान (Shenzhou-16 manned spaceship) से पौधों और कवक के बीज भेजे हैं। चीन द्वारा 136 तरह के बीज अंतरिक्ष में भेजे गए हैं। 53 संस्थानों की मदद से चलाए जा रहे इस प्रोजेक्ट के तहत कई तरह के फसलों, जंगली पौधों, घास, फूल, औषधीय पौधों और सूक्ष्मजीवों को अंतरिक्ष में भेजा गया है।

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चीन ने यह पहल स्पेस ब्रीडिंग प्रोग्राम के तहत किया है। इसमें बीजों को अंतरिक्ष में कॉस्मिक रेडिएशन और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण जैसी वातावरण में रखा जाता है। ऐसे माहौल में जीन म्यूटेशन तेजी से होता है। ओजोन की परत धरती पर कॉस्मिक रेडिएशन को आने से रोकती है। इसके साथ ही धरती पर गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होता है, जिससे जीन म्यूटेशन धीरे-धीरे होता है। चीन की कोशिश जीन म्यूटेशन की मदद से नई तरह की फसलों को तैयार करना है। चीन ने अंतरिक्ष में जीन म्यूटेशन की शुरुआत 1987 में की थी। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने सैकड़ों पौधों की प्रजातियों के बीज अंतरिक्ष में भेजे हैं। बता दें कि जीन म्यूटेशन वह प्रक्रिया है जिसमें जीव के डीएनए या आरएनए में बदलाव होते हैं। जीव के लिए जो बदलाव अच्छे होते हैं वे आगे जारी रहते हैं। इसके चलते पौधे और जानवर वक्त से साथ खुद को बदल पाए हैं।

30 मई को लॉन्च हुआ था शेनझोउ-16 अंतरिक्ष यान

30 मई को तीन अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर शेनझोउ-16 अंतरिक्ष यान रवाना हुआ था। ये अंतरिक्ष यात्री पांच महीने अंतरिक्ष में रहेंगे। गौरतलब है कि चीन और अमेरिका के बीच चल रही टक्कर अंतरिक्ष तक पहुंच गई है। चीन स्पेस मिशन के मामले में अमेरिका को चुनौती दे रहा है। चीन ने अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन बनाया है। 2003 में चीन के पहली बार इंसान को अंतरिक्ष में भेजा था। इसके साथ ही वह पूर्व सोवियत संघ और अमेरिका के बाद इंसान को अंतरिक्ष में भेजने वाला तीसरा देश बन गया था।