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खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड के बावजूद UNHRC में सर्वोच्च मतों से चुना गया पाकिस्तान, कईं देशों ने किया था विरोध

पाकिस्तान के खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड के बावजूद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में उसे दोबारा चुन लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय के लिए एशिया प्रशांत क्षेत्र की चार सीटों पर पांच उम्मदवारों में से पाकिस्तान को सर्वाधिक मत प्राप्त हुए हैं। 

Pakistan elected by highest votes in UNHRC despite poor human rights record
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New York, First Published Oct 14, 2020, 7:13 PM IST
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वाशिंगटन. पाकिस्तान के खराब मानवाधिकार रिकॉर्ड के बावजूद संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में उसे दोबारा चुन लिया गया है। इस चुनाव को लेकर कईं मानवाधिकार समूहों ने पाकिस्तान का विरोध किया था।  पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च मानवाधिकार निकाय के लिए एशिया प्रशांत क्षेत्र की चार सीटों पर पांच उम्मदवारों में से पाकिस्तान को सर्वाधिक मत प्राप्त हुए हैं। 

मतदान में सऊदी अरब बाहर हुआ

दरअसल, मानवाधिकार परिषद के नियमों के तहत भौगोलिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों को सीटें आवंटित की जाती हैं। 47 सदस्यीय मानवाधिकार परिषद में 15 सदस्यों का चुनाव पहले ही हो चुका था क्योंकि अन्य सभी क्षेत्रीय समूह के सदस्य निर्विरोध निर्वाचित हुये। सूत्रों के मुताबिक, संयक्त राष्ट्र महासभा के गुप्त मतदान में पाकिस्तान को 169 मत मिले हैं। इसके बाद उज्बेकिस्तान को 164, नेपाल को 150 और चीन को 139 मत मिले। 193 सदस्यीय महासभा में सऊदी अरब को सिर्फ 90 वोट मिल पाए जिससे वह इस दौड़ से बाहर हो गया। 

 

पांचवी बार निर्वाचित हुआ पाकिस्तान

पाकिस्तान फिलहाल एक जनवरी 2018 से मानवाधिकार परिषद का सदस्य है। फिर से चुने जाने पर उसे परिषद के सदस्य के तौर पर तीन साल का एक दूसरा कार्यकाल मिल गया है जो एक जनवरी 2021 से शुरू होगा। मानवाधिकार परिषद की स्थापना 2006 में हुयी थी, इसके बाद से यह पांचवा मौका है जब पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के सर्वोच्च निकाय के लिये निर्वाचित हुआ है। 

यूरोप, अमेरिका एवं कनाडा ने किया था विरोध
पिछले हफ्ते यूरोप, अमेरिका एवं कनाडा के मानवाधिकार समूहों के एक गठबंधन ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों से चीन, रूस, सऊदी अरब, क्यूबा, पाकिस्तान एवं उज्बेकिस्तान के निर्वाचन का विरोध करने का आह्वान किया था और कहा था कि इन देशों का मानवाधिकार रिकॉर्ड उन्हें अयोग्य करार देता है। रूस और क्यूबा पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं।    
 

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