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Ganesh Utsav: केरल में नदी के तट पर स्थापित है 10वीं शताब्दी का प्रसिद्ध गणेश मंदिर, बहुत रोचक है इसकी मान्यता

हमारे देश में भगवान श्रीगणेश के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं, ऐसा ही एक मंदिर केरल में मधुरवाहिनी नदी के तट भी है। इसे मधुर महागणपति मंदिर कहा जाता है। इसका इतिहास 10वीं शताब्दी का माना जाता है। प्रारंभ में यहां शिवजी का ही मंदिर था, लेकिन बाद में ये गणेशजी का मुख्य मंदिर बन गया।

Madhur Sri Madanantheshwara Siddhivinayaka Temple belongs to 10th century, know about it
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Ujjain, First Published Sep 13, 2021, 7:15 AM IST
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उज्जैन. भगवान श्रीगणेश को प्रथम पूज्य कहा जाता है यानी हर शुभ काम से पहले इनकी पूजा आवश्यक रूप से की जाती है। इन दिनों गणेश उत्सव (Ganesh Utsav 2021) चल रहा है, जिसके चलते गणेश मंदिरों में भीड़ उमड़ रही है। हमारे देश में भगवान श्रीगणेश के अनेक प्रसिद्ध मंदिर हैं, ऐसा ही एक मंदिर केरल में मधुरवाहिनी नदी के तट भी है। इसे मधुर महागणपति मंदिर कहा जाता है। इसका इतिहास 10वीं शताब्दी का माना जाता है। प्रारंभ में यहां शिवजी का ही मंदिर था, लेकिन बाद में ये गणेशजी का मुख्य मंदिर बन गया। आगे जानिए इस मंदिर से जुड़ी खास बातें…

दीवार पर उभरी है गणेश प्रतिमा

- क्षेत्र में प्रचलित मान्यता के अनुसार प्रारंभ में यहां सिर्फ शिवजी का ही मंदिर था। उस समय यहां पंडित के साथ उसका पुत्र भी रहता था।
- पंडित के छोटे बच्चे ने एक दिन मंदिर की दीवार पर गणेशजी की आकृति बना दी। बाद में ये चित्र धीरे-धीरे अपना आकार बढ़ाने लगा और ये आकृति बड़ी और मोटी होती गई।
- दीवार पर चमत्कारी रूप से उभरी इस प्रतिमा के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग आने लगे। बाद में यहां गणेशजी की पूजा मुख्य रूप से होने लगी।
- मंदिर के पास ही मधुरवाहिनी नदी है। इस नदी के नाम पर ही मधुर महागणपति के नाम से मंदिर प्रसिद्ध हुआ है।
- ये मंदिर केरल के कासरगोड शहर से करीब 7 किमी दूर स्थित है। यहां मोगराल नदी यानी मधुवाहिनी नदी बहती है। मंदिर में एक तालाब है।
-  मुदप्पा सेवा यहां मनाया जाने वाला एक विशेष त्यौहार है, जिसमें श्रीगणेश की प्रतिमा को मीठे चावल और घी के मिश्रण से ढंक दिया जाता है, जिसे मुदप्पम कहते हैं।

कैसे पहुंचें?
केरल देश के सभी बड़े शहरों से हवाई मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। केरल पहुंचने के बाद कासरगोड शहर पहुंचना होगा। यहां से 7 किमी दूरी पर ये मंदिर स्थित है। यहां का प्राकृतिक वातावरण बहुत ही मनमोहक है। इसीलिए यहां हजारों पर्यटक पहुंचते हैं।

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